जैन समाज के गौरवशाली युवकों का किया सम्मान

Jul 10 2025

ग्वालियर। थाटीपुर स्थित दिगंबर जैन मंदिर की घटना से सहयोग करने वाले दिगंबर जैन वरैया समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी ओर मार्गदर्शक संजय मणि जैन के साथ युवा टीम हम और आप एवं युवा महासभा के साथियों ने कंध से कंध मिलकर जैन मंदिर बचाओ आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। युवा साथियों ने खुद अपने हाथों से जैन मंदिर की टूटी दीवार को पुन: खड़ा कर कार सेवा किया।
श्रमण संस्कृति परमार्थ संस्थान ग्रेटर ग्वालियर के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने वरैया समिति के साथ कार सेवा करने वाले उन युवाओं में विशेष रूप से अंकित करहिया, सुरेंद्र करहिया, सोनू जैन कुलैथ, सोनू भंडारी, संदीप अमोला सहित अभिषेक जैन, संतोष परदेशी आदि का माला दुपट्टा उडक़र सम्मान श्रमण संस्कृति संस्थान के अध्यक्ष संतोष जैन खोया वाले, उपाध्यक्ष वीरेंद्र सर्राफ, पवन जैन, अशोक जैन प्रकाश जैन, नीरज जैन आदि ने किया। युवाओं का नेतृत्व वरैया समाज के मुखिया कर रहे थे तो वहां उपस्थित जन समुदाय के बीच से वरैया समाज जिंदाबाद की गूंज भी सुनाई दे रही थी। वरैया समाज जिंदाबाद की उस गूंज से मन बेहद प्रभुल्लित ओर गौरव की अनुभूति दिला रहा था। इस मौके पर राजकुमार जैन हाईकोर्ट, प्रकाश चंद जैन, अभिषेक जैन महासभा सहित समाजजन मौजूद थे। 
आचार्यश्री के सानिध्य मुनिश्री ने किए केशलोच
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि विधान में ग्वालियर गौरव मुनिश्री अमेर सागर महाराज ने अपने हाथों से सिर व दाढ़ी और मूछों के बाल नोंचा डाले। करीब दो घंटे के बाद मुनिश्री अपने हाथों से सिर, दाढ़ी और मूछों व चेहरे के बाल हटा चुके थे। आचार्यश्री सुबल सागर के सानिध्य में मुनिश्री अमेर सागर ने केशलोच किए। जैन संत अपने शरीर का आकर्षण समाप्त करने के लिए केश लोचन किया जाता है। यह एक तप है जिसे जैन धर्म में सहज भाव से स्वीकार किया जाता है। 
हुआ भारत और बाहुबली का नेत्र, जल, मल युद्ध, बाहुबली को हुआ वैराग्य
वधान में रात्रि में भरत चक्रवर्ती और बाहुबली का नाटिक मंच किया। जिसमे बताया गया कि भगवान ऋषभदेव के दोनों पुत्रों भरत और बाहुबली की अहम भूमिका है। भगवान आदिनाथ को राज पाठ के दौरान जब वैराग्य की प्राप्ति हो जाती है। तभी भरत को चक्रवर्ती बनने की सूझती है। दोनों बलशाली भाइयों के बीच 3 प्रकार की युद्ध होंगे और इस युद्ध में जो विजयी होगा वह चक्रवर्ती सम्राट माना जाएगा। वह तीन युद्ध नेत्र, जल, मल युद्ध हुए और तीनों में बाहुबली ने भरत को हराकर चक्रवती पद पा लिया। मगर जब भरत ने कहा कि मैं हार गया तो बाहुबली ने कहा कि भरत भाई तुम नहीं हारे तुम्हारा घमंड हारा है तुम्हारा अहंकार हारा है। और तब बाहुबली को एहसास हुआ कि मैंने अपने भाई को हरा दिया है और यह एहसास होती ही उन्हें संसार से वैराग्य उत्पन्न हो जाता है।