जैन तीर्थ बरासो से आई भगवान महावीर की प्रतिमा का इंद्रो ने किया अभिषेक

Jul 09 2025

ग्वालियर। आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में एवं सकल जैन समाज ग्वालियर की ओर से सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में विधान में जैन तीर्थ बरासो से आई भगवान महावीर की प्रतिमा का अभिषेक के साथ इंद्र इंद्राणी ने भक्ति भाव के साथ सिद्धों की आराधना के साथ पूजन कर 256 महाअर्घ्य समर्पित किए।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के सानिध्य में चक्रवती यात्रा में बाइक, एक्टिवा आदि गाडिय़ों पर युवा, बालिका ओर महिलाएं सिर पर टोपी पहनकर हाथों में पचरंगी जैन ध्वज लेकर चल रहे थे। उनके पीछे भरत चक्रवती का रथ विंटल कारों में सवार होकर निकले। डीजे के भजनों की लहरियों पर समाजजन भक्ति नृत्य कर रहे थे। 3 किलोमीटर की इस यात्रा में जैन समाज के लोगो ने आत्मिक पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। दिग्विजय यात्रा नई सडक़ से शुरू होकर, राम मंदिर, हाईकोर्ट, दाल बाजार, नया बाजार, दौलतगंज, महाराज बाड़ा, सराफा बाजार, गस्त का ताजिया,  दाना ओली, जनकगंज, हनुमान चौराहे से वापस नई सडक़ स्थित चंपाबाग बगीची पहुंची। 
 विधान में आचार्य सुबल सागर महाराज ने मंत्रो से भगवान जिनेंद्र का एवं जैन तीर्थ बरासो से आई भगवान महावीर की प्रतिमा का अभिषेक इंद्रों ने कलशों से किया।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि रात्रि को कार्यक्रम में राजा नाभिराय का दरबार सजाया गया। जिसमें सौधर्म सभा में कुबेर का आगमन हुआ। नगरी की रचना हुई।अष्टकुमारियों ने माता मरूदेवी की सेवा की। रतन वृष्टि के साथ मरुदेवी माता को नींद में 16 स्वप्न के दर्शन हुए। पूरी घटन राजा को बताई, इसके बाद गर्भ क्रियाएं के बाद अयोध्या नगर में बालक का जन्म होते ही खुशी से इंद्र इंद्राणी झूमने लगे। कुबेर ने अपना खजाना लुटाया।