मैं तो गोवर्धन को जाऊं मेरी वीर, ना माने मेरो मनुआ

Jul 02 2025

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन विष्णु उपाध्याय शास्त्री ने कहा कि श्रीराधा ही श्रीकृष्ण की आत्मा व हृदय हैं। श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा दोनों सब प्रकार से एक ही हैं। भक्तों को प्रेम रस प्रदान करने के लिए दो रूपों में अनादि काल से बने हुए हैं और अनंत काल तर्क बने रहेंगे। श्रीकृष्ण का स्वरूप है सत, चित और आनंद।
श्रीकृष्ण ही वृन्दावन बने हुए हैं, वे ही योगमाया बने हुए हैं और वे ही श्रीराधा बने हुए हैं तथा श्रीराधा ही अनंत गोपियां बनी हुई हैं और यही सत-चित-आनंदमयी लीला का रहस्य है। भगवान कृष्ण ने इंद्र का मान भंग करने के लिए बृजवासियों से गिरिराज पर्वत की पूजा करवाई। अंत में भागवतजी की आरती उतारी।