राज्यों को पीएमश्री स्कूल योजना का एमओयू साइन करने के लिए केंद्र मजबूर न करें:एआईडीएसओ
Jun 29 2025
ग्वालियर। देशभर में 14500 स्कूलों को अपने नियंत्रण में लेने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाई गई पीएमश्री योजना, पूरे देश में एनईपी 2020 को लागू करने की दिशा में ही एक कदम है। यह शिक्षा को केंद्रीकृत करने वाला कदम है जो संघीय सिद्धांतों के खिलाफ है। केंद्रीय शिक्षा विभाग ने कहा है कि पीएमश्री स्कूल एनईपी 2020 के आदर्श स्कूल होंगे ताकि राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन और पाठ्यक्रम में समानता लाई जा सके।
अब केंद्र सरकार उन राज्यों को फंड जारी नहीं कर रही है जिन्होंने पीएमश्री योजना के एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिनमें केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। यह राज्यों पर एनईपी लागू करने का दबाव है और सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का सीधा उल्लंघन है जिसमें कहा गया था कि किसी भी राज्य को एनईपी 2020 को अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा के केंद्रीकरण, सांप्रदायीकरण और व्यवसायीकरण करने की ब्लूप्रिंट है, जो सार्वजनिक वित्तपोषित शिक्षा को नष्ट कर गरीब बच्चों के शिक्षा के अधिकार को छीन लेगी। यह वैज्ञानिक, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक शिक्षा की बुनियादी अवधारणा को संघ परिवार के सांप्रदायिक एजेंडे में बदल देती है। भारत जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से विविध देश में ‘वन नेशन वन क्लासरूम’ का फॉर्मूला लागू नहीं किया जा सकता जैसा कि एनईपी 2020 में कल्पना की गई है।
एआईडीएसओ पूरे देश में पीएमश्री स्कूल योजना के जरिए एनईपी लागू करने और राज्यों को फंड जारी न करने की निंदनीय कार्रवाई की कड़ी भर्त्सना करता है। एआईडीएसओ सभी छात्रों और शिक्षा प्रेमियों से अपील करता है कि वे विनाशकारी एनईपी 2020 के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
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