भगवान हमेशा भक्त के वश में रहते हैं- मोहनदास महाराज

Jun 18 2025

ग्वालियर। सिद्ध पीठ श्री गंगादास की शाला में शहीद संतों की याद में चल रही भागवत कथा में मदन मोहन दास महाराज ने कहा कि प्रभु हमेशा अपने भक्तों के वश में रहते हैं। प्रभु का एक नाम दीनबंधु भी कहा गया है। दीनबंधु नाम को सिद्ध करने के लिए भगवान ने सुदामा के लिए सुदामापुरी का निर्माण कर दिया। जबकि एक समय सुदामा जी की स्थिति यह थी कि उन्हें और उनके पूरे परिवार को चार-चार दिन तक भूखा रहना पड़ता था। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री कृष्ण ने सुदामा जी के द्वारिका पहुंचने पर बहुत सम्मान किया। यह सम्मान उनकै सम्मान और त्याग का था। 
आज के जीव के पास सब कुछ होने पर भी उस के अंदर संतुष्टि नहीं है। पर सुदामा जी के घर में खाने को अन्न नहीं होने, पहनने को वस्त्र नहीं होने के बाद भी सांतोष था। लेकिन उनके भीतर परम सांतोष था। आज के जीव के भीतर संतोष नहीं है। जीवन में शांति चाहिए तो हमें प्रभु की शरण लेना चाहिए। कथा से हमें यह सीखना है कि जीवन में संतोष होना बुहत जरूरी है। जीवन में संतोष होगा तो ही प्रभु की कृपा होगी। कथा में महाराज ने कहा की हमारा मन बड़ा चंचल है। इस चंचल मन को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए।