हाथो से बालों को उखाडऩा शरीर को कष्ट देना नहीं-आचार्यश्री सुबल सागर

Jun 18 2025

ग्वालियर। जैन तीर्थ सोनागिर में आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने  अपने कैश लोंच किए। आचार्यश्री सुबल सागर ने अपने हाथों से करीब ढाई घंटे में सिर व दाढ़ी और मूछों के साथ चेहरे के बाल नोंचा डाले। आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने कहा कि महावीर भगवान कहते है की हाथो से बालों को उखाडऩा शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि शरीर की उत्कृष्ट साधना शक्ति का परिक्षण है। 
कैंची से या अन्य भौतिक उपकरणों से बाल कटवाने पर दीनवृत्ति का जन्म होने लगता है, जबकि दिगम्बर साधू दीन्तारहित अन्तरंग व् बहिरंग परिग्रह से रहित होते है, अगर अपने बालो को किसी भी नाई से कैंची द्वारा कटवाए तो पैसे आदि की आवश्यकता पड़ेगी, उस हेतु दूसरो से धन की याचना करनी पड़ेगी जिससे स्वाभिमान व स्वावलंबन होता है, इन सभी दोषों से बचने के लिए व शरीर से निर्ममता को सूचित करने के लिए दिगम्बर जैन साधू हाथो से ही केशों को दो या तीन या चार माह में उखाडक़र फेक देते है। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया की जैन संत मुनिश्री, आचार्यश्री, आर्यिका आदि स्वयं अपने शरीर के बालों को हाथों से उखाड कर केशलोचन करते है। दिगंबर मुनि को हर 2-4 माह में केश लोंच करना ही अनिवार्य होता है क्यूंकि जब दाढ़ी और मस्तक, मूँछ के केश बड़े होते है तो उनमे छोटे छोटे जीव उत्पन्न होने लगते है।
प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि सकल जैन समाज ग्वालियर की ओर से चतुर्मास के लिए श्रीफल भेंटकर आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ का जैन तीर्थ सोनागिर से ग्वालियर की ओर मंगल विहार 19 जून को प्रात: 5 बजे होगा।