धरातल की काव्य संध्या सम्पन्न

Jun 17 2025

मंदिरों की नहीं तलाश मुझे, मुझपे मेरे पिता का साया है। पितृ दिवस पर आयोजित गोष्ठी में संचालक देवेन्द्र राही ने उक्त पंक्तियों से प्रारंभ किया। डा मधुलिका सिंह के सिटी सेंटर स्थित निवास पर सम्पन्न इस गोष्ठी में अध्यक्षता कर रही थीं डा जयमाला मिश्रा, मुख्य अतिथि थे चेतराम भदौरिया श्रमिक। डा हेमलता कश्यप के सुमधुर गीत जीवन की राहों पर बढऩा आसान नहीं सुनाया। दीप ज्योति गुप्ता ने सुनाया  रिश्ते नाते झूठे सारे सब दौलत के प्यासे हैं। उछल रहे हर ओर यहां पर बस शकुनि के प्यासे हैं। 
इसी क्रम में नवीन शायरा रेशमा बानो हासमी ने गज़़ल कही  तुमसे बात नहीं होती तो दिल मेरा घबराता है। बोल तुम्हारे दो सुन लूं तो मुझको सुकून आ जाता है।
धरातल के नवीन सदस्य डीके सक्सेना उत्तम गीत पढ़ा, कुछ दिन संवर कर बिखर गये हम कैसी मिजाजों की रीत रे।इसी क्रम में पुष्पा मिश्रा ने प्रस्तुत किया गीत, कैसे लिख दूं गीत प्रेम के कैसे मैं श्रृंगार लिखूं।
गज़़ल गो सुधीर कुशवाह ने पर्यावरण पर उम्दा गज़़ल पढ़ी,धरती पर हरियाली लिखना। रोज़ घटाएं काली लिखना। विजय कृष्ण योगी ने कहा, है युवाओं एक कृष्ण पैदा करो,जो बजाए वेणु अपनी। जगदीश गोकलानी ने पितृ दिवस पर दोहे सुनाए,डांट पिताजी की पड़े उसके पीछे प्यार। ऊपर से वे सख्त हैं अंदर नेह अपार।डा मधुलिका जी के गीत ने अद्भुत समां बांधा यूं जब भी घिरे गगन में बादल तेरी याद बहुत आई। कैसे कहूं प्राण में तुमसे मन की बात नहीं कह पाई।
कुमारेश तिवारी ने कहा  उठो देश के वीर जवानों दुश्मन ने ललकारा है। विशिष्ट अतिथि श्री रमेश वियोगी जी ने गज़़ल पेश की एक सच आपको बताना है। आज आए हो कल तो जाना है। 
मुख्य अतिथिचेतराम भदौरिया श्रमिक ने गीत कौन ने पहनाई मुंदरिया सुनाया। अध्यक्षता कर रही डा जयमाला मिश्रा ने गोष्ठी को सर्वोच्च शिखर दिया अपने गीत से। कार्यक्रम में विशेष आमंत्रित पर्यावरण विदुषी श्रीमती संगीता कुशवाहा ने सदस्यों को सकोरे भेंट किए। दाना पानी संस्था के अनिरुद्ध विक्रम सिंह भी मौजूद रहे। आभार देवेन्द्र राही ने व्यक्त किया।