मन को संसार की आसक्ति से हटाकर भगवान की आराधना में लगाना होगा-आचार्य विक्रम
Jun 06 2025
ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में भगवताचार्य विक्रम महाराज ने कहा मन को संसार की आसक्ति से हटाकर भगवान की आराधना में लगाना होगा। कर्म करने वाली इन्द्रियों से भक्ति संबंधी कर्म करना, भगवान के, संतों के वाक्यों में श्रद्धा रखकर प्रभु के नाम का उच्चारण करना, अपमान सम्मान को सहना, सकाम कर्मों को, निष्काम कर्मों को करके उन्हें श्रीकृष्णार्पण करना, यही गुरुजनों के उपदेश हैं। हम से कुछ न बन पड़े तो सायं प्रात: गुरुदेव भगवान का ध्यान करके उन्हें प्रणाम करना।
हम लोगों को गुरुदेव ने भक्तमाल के श्रीमद्भागवत के सत्संग का जो उपदेश दिया है उन वचनों को आत्मसात करना हमारा प्रथम कर्त्तव्य है। भक्त चरित्रों को नित्य कहने-सुनने से ही हम माया से बचकर श्रीकृष्ण कृपा को प्राप्त कर सकेंगे। एक साधन में विश्वास रखने से ही मन स्थिर रहता है। रोगी को स्वस्थ होने के लिए स्वयं दवा खानी पड़ेगी। स्वयं कुपथ्य से बचना पड़ेगा। इसी तरह से साधक को स्वयं संयम-नियम का पालन करना चाहिए और मन को भजन साधन में लगाना चाहिए। तभी मनुष्य वास्तविक लक्ष्य परम धाम को प्राप्त कर सकेगा।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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