श्रीमद्भागवत का आश्रय लेना ही भगवान की शरण में जाना है

Jun 05 2025

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन धाम से पधारे आचार्य विक्रम महाराज ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि उद्धवजी श्रीकृष्ण के साथ ही धाम जाना चाहते थे, तब प्रभु ने उद्धव के समक्ष ही अपना सम्पूर्ण तेज-प्रभाव श्रीमद्भागवत में स्थापित कर दिया। यही कारण है कि श्रीमद्भागवत में श्रीकृष्ण की छवि है। भागवत में नाम, रूप, लीला, धाम सब कुछ है। अत: श्रीमद्भागवत का आश्रय लेना ही भगवान का आश्रय लेना है। उन्होंने कहा कि भक्तों के लिए रसिकों की वाणी ही वेद है, क्योंकि वेद का तात्पर्य भागवत-रामायण में है और भागवत-रामायण का तात्पर्य ही रसिक भक्तों की वाणी में है। यही कारण है कि गीत गोविंद, कृष्णकर्णामृत, भक्तमाल आदि प्रभु को प्रिय हैं।