मुनिश्री क्षमा, दया, त्याग पत्र की प्रतिमूर्ति थे: शास्त्री

Jun 02 2025

ग्वालियर। मुनिश्री 108 तीर्थ सागर महाराज का उज्जैन स्थित महावीर तपोभूमि पर आचार्य गुरुदेव प्रज्ञा सागर महाराज के सानिध्य में समाधि पूर्वक मरण हुआ। ग्वालियर के पास स्थित कराहिया ग्राम में जन्मे मुनिश्री तीर्थ सागर महाराज की विनयांजलि सभा सकल जैन समाज की ओर से नई 2 उक स्थित चंपाबाग धर्मशाला में आयोजित की गई। 
समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि विनयांजलि सभा में सर्वप्रथम मुनिश्री तीर्थ सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित प्रमोद जैन ओर कोमलचंद्र जैन ने किया। पंडित चंद्रप्रकाश जैन ने सामूहिक सामयिक पाठ और समाधि मरण पाठ का वाचन किया। 
अजीत कुमार शास्त्री ने विनयांजलि देते हुए कहा कि मुनिश्री ने सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र का साथ लेते हुए भगवान महावीर के उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। मुनिश्री तीर्थ सागर बहुत ही सरल और वात्सल्य पूर्ण स्वभाव के धनी थे। वे क्षमा, दया, आर्जव गुणों से परिपूर्ण त्याग पत्र की प्रति मूर्ति थे। 
विधायक सतीश सिकरवार ने कहा कि संयम पूर्वक देह का त्याग करना सबसे बड़ी विशेषता जैन दर्शन में बताई गई है। मुनिश्री संयम के कठिन मार्ग पर चलते हुए मार्गदर्शन देते रहे।