गुरुद्वारों पर ठंडे पानी की छबीलें लगाकर लोगों की प्यास बुझाई

May 30 2025

ग्वालियर। गुरु अर्जनदेव की याद में शहर के गुरुद्वारों सहित कई स्थानों पर ठंडे पानी की छबीलें लगाई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में यहां से गुजर रहे लोगों की प्यास बुझाई। गुरुद्वारों पर सिख समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर सेवा कार्य किया। वहीं दिन भर विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने लंगर में प्रसादी ग्रहण की। गुरु अर्जनदेव की याद में फूलबाग गुरुद्वारा में अखंड साहब का पाठ किया। 
इस दौरान फूलबाग गुरुद्वारा में ग्वालियर के अलावा डबरा, घाटीगांव, दतिया, मुरैना, भिंड, भांडेर आदि क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंचे। श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर फूलबाग गुरुद्वारा पहुंचे। वहीं मीठा शर्बत बनाने के लिए ठंडे पानी का टैंकर गुरुद्वारे के बाहर सुबह ही पहुंच गया था। इससे पानी ड्रमों में भरकर सिख समाज के युवाओं ने राहगीरों के लिए ठंडा शर्बत तैयार किया।
गुरु अर्जनदेव धर्म रक्षक और मानवता के सच्चे प्रेमी थे। वे सिखों के पांचवें गुरु थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा में ही व्यतीत किया। सन् 1606 में लाहौर में जहांगीर ने उन्हें बंदी बना लिया था और मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। कैद के दौरान उन्हें कई यातनाएं दी गई। गुरु अर्जन देव धर्म रक्षक और मानवता के सच्चे सेवक थे और उनके मन में सभी धर्मों के लिए सम्मान था। मुगलकाल में अकबर, गुरु अर्जनदेव के मुरीद थे, लेकिन जब अकबर का निधन हो गया तो इसके बाद जहांगीर के शासनकाल में इनके रिश्तों में खटास पैदा हो गई। ऐसा कहा जाता है कि शहजादा खुसरो को जब मुगल शासक जहांगीर ने देश निकाले का आदेश दिया था, तो गुरु अर्जनदेव ने उन्हें शरण दी। यही वजह थी कि जहांगीर ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। गुरु अर्जनदेव ईश्वर को यादकर सभी यातनाएं सह गए और 30 मई 1606 को उनका निधन हो गया।