पूरा घुटना बदलने की जरूरत नहीं:डॉ मंडोवरा

May 25 2025

ग्वालियर। घुटने के दर्द से पीडि़त रोगियों के लिए एक राहत की बात है, अब पारंपरिक सम्पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण की आवश्यकता को नवीनतम तकनीक द्वारा कम किया जा सकता है। इस उन्नत पद्धति के अंतर्गत, घुटने के खराब कम्पार्टमेंट को बदला जाता है, जिससे शेष प्राकृतिक घुटने को बचाया जा सकता है। यह जानकारी इंदौर के ऑर्थोपेडिक एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. हेमंत मंडोवरा ने ग्वालियर में आयोजित एक ऑर्थोपेडिक लाइव सर्जरी कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों के साथ अपने विचार साझा करते हुए दी।
डॉ. हेमंत मंडोवरा ने सत्र के दौरान यूनिकम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट से जुड़ी नवीनतम तकनीकों, उपयुक्त रोगी चयन के मानदंडों, संभावित जटिलताओं के प्रभावी प्रबंधन और ऑपरेशन के उपरांत आवश्यक देखभाल जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी साझा की। 
डॉ. हेमंत मंडोवरा ने कहा अनेक मरीजों को पूरे घुटना बदलने की जगह केवल आंशिक प्रतिस्थापन की ही आवश्यकता होती है, जिसमें घुटने के केवल प्रभावित या क्षतिग्रस्त हिस्से को बदला जाता है। यदि यह सर्जरी सही समय पर और उचित मानदंडों के अनुसार की जाए, तो मरीज शीघ्र स्वास्थ्य लाभ करता है और उसकी जीवनशैली की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में केस स्टडीज, सर्जिकल डिमॉन्स्ट्रेशन और गहन प्रश्नोत्तर सत्रों के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान हुआ। 
ग्वालियर ऑर्थोपेडिक सोसायटी के अध्यक्ष, प्रो. डॉ. आरएस बजोरिया ने कहा, इस प्रकार के आयोजन चिकित्सकों को नवीनतम वैश्विक तकनीकों से अवगत कराते हैं और उपचार की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। डॉ. आशीष दुबे ने सत्र की सफलता पर प्रकाश डालते हुए कहा, डॉ. मंडोवरा के विशेषज्ञ मार्गदर्शन में यह सत्र सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। हम भविष्य में भी इस प्रकार के ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस आयोजन में वरिष्ठ सर्जन डॉक्टर वीपी मिड्ढा, प्रोफेसर समीर गुप्ता, प्रोफेसर आरके धाकड़, डॉक्टर अनुपम गुप्ता एवं अन्य सर्जन भी उपस्थित थे।