महानाट्य अहिल्या रूपेण संस्थिता का मंचन हुआ

May 25 2025

ग्वालियर। अहिल्या रूपेण संस्था महा नाटक सजीव मंचन हुआ। शिवजी की अनन्य भक्त लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की न्यायप्रियता, दयालुता, मानवता, समरसता, कूटनीति, परमार्थ और पराक्रम मंच पर ऐसा सजीव हुआ, कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। मौका था देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में जीवाजी विश्वविद्यालय के अटल सभागार में आयोजित महानाट्य ‘अहिल्या रूपेण संस्थिता’ का। 
मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद एवं प्रयास बहुउद्देशीय सामाजिक संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस नाटक में करीब 80 कलाकारों ने नाटक की निर्देशिका प्रियंका शक्ति ठाकुर के निर्देशन में देवी अहिल्याबाई के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों के माध्यम से उनके जीवन एवं सुशासन को जीवंत प्रस्तुत किया। दिल छू लेने वाले नाटक के संवाद और अदायगी दर्शकों को बांधे रखी। अहिल्याबाई की भूमिका नागपुर की प्रियंका शक्ति ठाकुर ने ही निभाई। 
नाटक के मंचन से पहले इस नाटक की लेखिका अखिल भारतीय साहित्य परिषद की राष्ट्रीय मंत्री निराला सृजन पीठ मध्यप्रदेश शासन संस्कृति परिषद की निदेशक डॉ. साधना बलवटे की पुस्तक का विमोचन मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट, अध्यक्षता कर रहे श्रीधर पराडकऱ, यशवंत इंदापुरकर, जेयू के कुलगुरू आचार्य प्रो.राजकुमार वाजपेयी, भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया ने किया। 
इस अवसर पर श्री पराडकऱ ने अहिल्याबाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारा कार्य जितना अच्छा होगा, जीवन उतना ही महान होगा। उन्होंने लोगों से लोकमाता अहिल्याबाई के जीवन को आत्मसात करने की अपील की।
नाटक की शुरुआत गंगा मैया की आरती के साथ हुई। इसके बाद नाटक फ्लैशबैक में जाता है। उसमें दिखाया जाता है कि अहिल्याबाई रास्ते में बैठकर शिव की भक्ति में लीन हैं। पेशवा की सवारी आने पर भी वह निडर होकर बैठी रहती हैं। इससे प्रभावित होकर मल्हार राव होलकर ने महाराष्ट्र के गांव चौंडी के पटेल मानकोजी की बिटिया अहिल्या को अपने पुत्र खांडेराव से विवाह के लिए हाथ मांग लिया। मल्हार राव की पारखी नजर ने पहचान लिया था अहिल्याबाई वो हीरा है जो उनके राज्य के मुकुट में सुशोभित होने के योग्य है। महारानी गौतमाबाई और सूबेदार मल्हार राव होलकर के प्रश्रय और प्रशिक्षण में अहिल्याबाई ने शास्त्र, शस्त्र, प्रशासन और राजनीति में स्वयं को पारंगत किया। अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और कार्यकुशलता के आधार पर अहिल्याबाई ने मालवा की राज्य व्यवस्था को सुदृढ़ किया। 
अपनी न्यायप्रियता, सद्चरित्रता, शुचिता, अनुशासनप्रियता के कारण अहिल्याबाई होलकर ने अनेक अवसरों पर कठोर निर्णय लिए। उनके राज्य में न केवल मनुष्य वरन पशु-पक्षी भी न्याय के अधिकारी थे। गाय के बछड़े की मृत्यु जो कि उनके पुत्र मालेराव के कारण हुई थी, उसके लिए अपने बेटे को भी दण्ड देने से पीछे नहीं हटी थी।
संघर्षों से जूझकर समाधान की ओर ले जाता अहिल्याबाई होलकर का जीवन नारी जीवन के लिए संदेश देता है कि वह किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने अपने जीवन काल में अपने कई प्रियजनों की मृत्यु देखी फिर भी वे कभी अपने कर्तव्य से विमुख नहीं हुईं। वे भारतीय नारी की गरिमा उसके गौरव और महिमा का साक्षात उदाहरण हैं।