कर्मफल को हंसते हुए स्वीकार करें: स्वामी विद्यानंद
May 23 2025
ग्वालियर। पूर्व कर्मों का प्रारब्ध मनुष्य का कर्मफल बनता है। हर व्यक्ति संसार में अपने कर्मों का फल ही भोगता है, इसलिए कर्मफ ल को हंसते हुए भोगना चाहिए। यदि आपके जीवन में कोई दुख है, तो निश्चितरूप से उसका संबध में आपके कर्मफल से है, इसलिए इस भाव से जीवन जिओ कि ईश्वर जो करता है वो अच्छा करता है। यह विचार भावभावेश्वर तीर्थ वरूमाल के महामंडलेश्वर स्वामी विद्यानंद सरस्वती ने सनातन धर्म मंडल में आयोजित श्रीमद्भागवत प्रसंगों पर प्रवचन करते हुए व्यक्त किए। स्वामी विद्यानंद ने कहा कि कर्म के अनुसार फल भोगना ही पड़ता है, यदि ऐसा नहीं होगा तो परमसत्ता से कोई डरेगा ही नहीें। व्यक्ति के कर्म ही उसकी मृत्यु का कारण बनते हैं। हम सोच रहे हैं कि हमारे कर्मों को कौन देख रहा है,लेकिन ये न भूलें कि हमारे कर्मों को जल अग्नि, वायु आकाश, सूर्य चंद्रमा तो देख रहे हैं, ये भगवान के दूत हैं, इसलिए इस भ्रांति में मत रहना कि कोई नहीं देख रहा है। इसलिए सत्कर्म, दान पुण्य करते रहिए, जिससे अंतकरण पवित्र होता है। आनंद ही नारायण हैं, लेकिन हम उसकी अनूभूति नहीं कर पा रहे हैं, जो ब्रह्म के आनंद में निमग्न रहते हैं, उन्हें भौतिक विषयों से प्रीति नहीं होती है।
इस मौके पर सनातन धर्म मंडल के विजय गोयल, हरीशंकर सिंह, रमेश गोयल लल्ला, राजेश वंसल, राकेश वंसल, नारायण ब्रजवासी, सुरेश वंसल, आरके खेतान, सुनील अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल अरविंद त्रिपाठी, सुनील शर्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालु श्रोता मौजूद रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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