भोजन व भजन ठीक कर लो, बाकी भगवन ठीक कर देंगे:कौशिक महाराज

May 21 2025

ग्वालियर। भोजन यदि सात्विक और सुपाच्य होगा तो भजन में भी मन लगेगा। जिसने अपना भोजन एवं भजन ठीक कर लिया, उसका जीवन भगवान स्वयं संवार देंगे। यह विचार कौशिक महाराज ने फूलबाग शिवलोक धाम में आयोजित हो रही शिवमहापुराण कथा केे सांतवे दिन बुधवार को व्यक्त किए। गुरूवार को भगवान शिव के 112 अवतारों की कथा होगी तथा शुक्रवार को 12 ज्योतिर्लिगों का वर्णन किया जाएगा। 
उन्होंने कहा कि भगवान का भजन करते हुए आनंदपूर्वक भोजन बनाएं और जब परिवार के सदस्य उसे शांतिपूर्ण ढंग से ग्रहण करेंगे तो वह अमृत के समान गुणकारी हो जाएगा, इसलिए भोजन करते समय पति से न लड़ें। हाथ-पैर धोकर कुल्ला करने के बाद ही भोजन करें। उन्होंने बताया कि शिव-पार्वती का विवाह संसार का पहला विवाह था, जिसे सभी सनातनी आदर्श मानते हैं, लेकिन आजकल विवाह में जिस तरह के भोज होते हैं, तो लगता है कि सारे भूखें इक_े हो गए हैं। चाट के स्टॉलों पर ऐसे टूटते हैं जैसे भोजन करने नहीं आयोजक की व्यवस्था बिगाडने गए हों। 
उन्होंने कहा कि कन्यादान से बड़ा कोई पुण्यफल नहीं हैं, एक बेटी का कन्यादान करने से हजार यज्ञ का फल मिलता है। कम से कम 24 घंटे निराहार रहकर प्रसन्नतापूर्वक कन्यादान करें। वो माता-पिता भाग्यशाली जिन्हेें अपने घर से बेटी की विदाई का अवसर मिलता है, लेकिन आजकल तो मैेरिज गार्डन और होटलों से विदाई होने लगी हैं, ये नकली परंपराएं ज्यादा दिन नहीं टिकेंगी और लोग फिर से अपनी संस्कृति की ओर लौटेंगे।  
उन्होंने कहा कि जिस तरह हर किसी को गौदान नहीं किया जाता है, इसी तरह हर किसी को कन्यादान भी नहीं किया जाता है। बेटी के लिए वर सवा गुना धनवान तो देखें, लेकिन दस गुना धनी न देखें, ऐसा करने से बेटी दुखी रहेगी। धन के साथ लडक़े वालों को व्यवहार भी देखें। किसी के दबाव में अपनी बेटी का संबध नहीं करें।  
उन्होंने कहा कि बेटी जब पैदा होती है तो इसका दुख नहीं होता कि उसके विवाह के लिए दहेज कैसे जुटाएंगे, बल्कि इस बात से बेटी के बड़ी होने पर माता पिता परेशान होने लगते हैं कि बेटी घर छोडक़र चली जाएगी। बेटी की विदाई करना संसार का सबसे मुश्किल काम हंै।
इस मौैके पर कथा परीक्षत सरिता नरेंद्र शर्मा, मनीष शर्मा, कंचनमणि शर्मा, आदित्य सिकराव, गौंची, पं रामदेव शास्त्री, रामबाबू अग्रवाल, उमेश उप्पल,महेन्द्र शुक्ला सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।