शिक्षा के नए नियमों के चलते हजारों छात्र स्नातकोत्तर की पढ़ाई से होंगे वंचित

May 21 2025

ग्वालियर। अभी हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्नातकोत्तर(पीजी) में प्रवेश के लिए स्नातक (यूजी) के मेजर/माइनर विषय की अनिवार्यता व स्नातक में एटीकेटी संबंधी आदेश पर छात्र संगठन एआईडीएसओ के राज्य अध्यक्ष अजीत सिंह पंवार ने बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में छात्रों व शिक्षा पर लगातार प्रयोग जारी हैं। 
इसी कड़ी में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी किया गया है जिसके तहत स्नातकोत्तर डिग्री में प्रवेश के लिए मेजर /माइनर विषयो को अनिवार्य किया गया है। जबकि नई शिक्षा नीति 2020 मल्टीप्ल चॉइस, मल्टीप्ल एंट्री/ एग्जिट की बात कहती है जो आपस में विरोधाभासी है। इस नियम के कारण छात्र मेजर/माइनर के अलावा अन्य तीसरे विषय से स्नातकोत्तर की डिग्री नही कर सकता है। विज्ञान व कॉमर्स के छात्र कला संकाय की विषयों से एमए नही कर सकते हैं। जिसके कारण हजारों छात्र स्नातकोत्तर डिग्री से वंचित हो जाएंगे। 
क्योंकि स्नातकोत्तर विज्ञान संकाय में सीट संख्या कम रहती है, छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ एमए करते थे तथा कई छात्र स्नातकोत्तर में एक से अधिक डिग्री कर अलग अलग विषयों में अपने ज्ञान का विस्तार कर सकते थे। विषय की अनिवार्यता से सभी छात्र एक झटके में स्नातकोत्तर डिग्री से वंचित हो जाएंगे।               
उच्च शिक्षा विभाग के एक अन्य आदेश में छात्रों को स्नातक में एक से अधिक अधिक विषयों में एटीकेटी आने पर अनुत्तीर्ण कर दिया जाएगा। उपरोक्त आदेश छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर धकेलने वाले हैं। जिसका पुरजोर विरोध करने की जरूरत है। यदि यह नियम तुंरत वापिस नही लिए जाते तो छात्र सडक़ों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के बाद शिक्षा व्यवस्था को प्रयोगशाला में तब्दील कर छात्रों पर तरह तरह के प्रयोग जारी हैं। जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
मध्यप्रदेश में शिक्षा नीति लागू करने के बाद सरकार ने जो लोक लुभावने नारे दिए थे कि शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव आ जायेगा लेकिन इस नीति के 4 वर्ष बाद शिक्षा व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। लगातार फीस बढ़ाई जा रही है। छात्रवृत्ति में कटौती, खराब परीक्षा परिणाम, पाठ्यक्रम की किताबें समय पर उपलब्ध न होना, मेजर/माइनर के बीच छात्र झूल रहे हैं। अभी स्नातकोत्तर की किताबें प्रकाशित न होने पर (बिना किताबों के पढ़ेगा इंडिया) प्रोफेसर को अनुभव के आधार पर पढाने की दलील उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दी जा रही है। नई शिक्षा नीति का मूलमंत्र शिक्षा के मूल सार चरित्र निर्माण, वैज्ञानिक सोच को खत्म कर व्यवसायीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके खि़लाफ़ में छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों से एकजुट होने व छात्र आंदोलन को तेज करने की अपील करते हैं।