मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है इस जीवन को आनंद के साथ जीना चाहिए-शुद्धात्म शास्त्री

May 21 2025

ग्वालियर। मानव जीवन बहुत कीमती है और उस जीवन को धार्मिक सिद्धांतों के साथ किस प्रकार से आनंद दायक बनाया जा सकता है। क्रोध, मान, माया, लोभ, हिंसा,झूठ, चोरी, कुशील, परिग्रह आदि कषाय और पापों करते समय करने वाले व्यक्ति के शरीर के क्या हाव भाव होते हैं, और उपरोक्त पापों को नहीं करने वाले व्यक्ति के चेहरे का आनंद देखने लायक होता है। यह बता युवा जैन मिलन नेमीनाथ शाखा की ओर से आयोजित जैन युवा बाल संस्कार शिक्षण शिविर में जीवन का आनंद सेमिनार को संबोधित करते हुए युवा विद्वान मोटिवेशनल गुरु डॉ. शुद्धात्म जैन शास्त्री ने लगभग 300 बाल युवा एवं महिला को 45 मिनट के सेमिनार में प्रकाश डाला। 
शुद्धात्म जैन ने आगे कहा कि बाहर में दिखने वाले व्यवहार सबसे पहले व्यक्ति के मन में होते हैं। दुनिया का हर व्यक्ति मन को अशांति देने वाले विकारों को यदि मन में स्थान ना दे, और शिक्षण शिविरों, पाठशालाओं के माध्यम से नैतिक एवं धार्मिक संस्कारों को ग्रहण करें। तो हर बाल युवा प्रौढ़ निर्विकार होकर अपने वर्तमान जीवन को आनंद दायक बना सकता है। वही सेमिनार के दौरान बालिका बालक एवं महिलाओं से प्रश्न पूछने पर सही जवाब देने वाले को पुरुस्कार दिया गया।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि जैन बाल युवा संस्कार शिविर में बच्चों को छोटे बच्चो को मौखित, आरती जैन बालबोध प्रथम भाग, सांगानेर से आए विद्वान अरिहंत जैन दूसरा भाग एवं महिलाओ व पुरुष को विद्वान डॉ विजय जैन छहढाल क्लास में ज्ञान की पढ़ाई का अध्ययन के साथ शिक्षा दे रहे है।