अभिमान का हनन कर बने राम भक्त हनुमान: स्वामी विद्यानंद

May 21 2025

ग्वालियर। वरूमाल पीठ के महामंडलेश्वर स्वामी विद्यानंद सरस्वती ने सनातन धर्म मंडल में आयोजित श्रीमद्भागवत पर प्रवचन करते हुए कहा कि अहंकार रहित सेवा करें। हनुमानजी की बहुत ही सुंदर व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि हनु मान जिसने अपने अभिमान का हनन कर दिया, तभी उन्हेें श्रीराम ने अपने गले से लगाया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति को सद्गुरू अथवा भगवत भक्त का आलिंगन करने का अवसर मिलता है तो वह प्रसन्नता से भर जाता है, तो जिसे प्रभु का आलिंगन करने का अवसर मिला हो उसके आनंद की सिर्फ कल्पना की जा सकती है। उन्होंने कहा कि विद्या विनय सिखाती है और जो विद्या पाकर भी विनयशील नहीं होता उसकी विद्या व्यर्थ है। गुरू की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि सद्गुरू पर कभी संशय मत करिए, यह विश्वास करिए कि मेरे सद्गुरू जैसा कोई नहीं हो सकता है। गुरू के चरणों का आश्रम लेकर लौकिक एवं आलौकिक दोनों प्रकार के सुख प्राप्त हो जाएंगे। अहंकार सबसे बड़ा दोष है। जिस प्रकार आवरण युक्त लोहे को पारस पत्थर स्वर्ण नहीं बना सकता ठीक उसी प्रकार अहंकार युक्त अंत:करण का सदगुरु का उपदेश भी कल्याण नहीं कर सकता। जब तक गुरू के चरणों में झुकोगे नहीं तब तक कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकोगे। सदगुरु कृपा से सब कुछ प्राप्त हो जाता है। 
इस मौके पर सनातन धर्म मंडल के अध्यक्ष विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष हरीशंकर सिंह, प्रधानमंत्री रमेश गोयल लल्ला, संयुक्त प्रधानमंत्री राजेश वंसल, कोषाध्यक्ष राकेश वंसल, नारायण ब्रजवासी, सुरेश वंसल, आरके खेतान, सुनील अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, अरविंद त्रिपाठी, सुरेंद्र शर्मा, जलज गोयल सुनील शर्मा, मनोज सांघी सहित सैकड़ों श्रद्धालु श्रोता मौजूद रहे।