जिसकी संतान सुयोग्य होती है वो सबसे बड़ा धनवान: कौशिक महाराज

May 20 2025

ग्वालियर। जीवन में सबसे बड़ा सुख संतान सुख होता है, जिसकी संतान सुयोग्य होती है, वो व्यक्ति सबसे बड़ा धनवान होता है, इसलिए बचपन से ही अपने बच्चों को संस्कारित करें। यह विचार शिवलोक धाम फूलबाग में आयोजित हो रही शिवमहापुराण कथा के छंठवे दिन मंगलवार को कौशिश महाराज ने व्यक्त किए। कथा संयोजक एवं विधायक डॉ. सतीश सिकरवार ने आरंभ में व्यासपीठ का पूजन कर आरती की। 
इस मौके पर उन्होंने अचलेश्वर सरकार हैं, महादेव का द्वार हैं, जो कोई पूजे सच्चे दिल से, उसका बेड़ा पार है...भजन सुनाकर भक्तों को भाव विभोर कर दिया। इस मौके पर अहिवरन सिंह कुटा पहलवान एवं वीर सिंह यादव सरपंच ने गौसेवा के लिए 51-51 हजार की सहयोग राशि तुलसी तपोवन गौशाला को दान की, वहीं सुरेश चंद्र कस्तवार लोहिया बाजार ने 21 हजार रुपए की राशि दान की। 
कौशिश महाराज ने बताया कि पूजा का दर्शन भी प्रभावकारी होता है, जिस तरह बुरा सुनने, देखने व बोलने से पाप बढ़ता है, उसी तरह अच्छा सुनने व देखने से पुण्य बढ़ता है। उन्होंने कहा कि सुबह उठकर माता-पिता और गाय के दर्शन करना शुभ होता है। खाली बर्तन, बिना तिलक का ब्राह्मण, कान फडफ़ड़़ता स्वान, बिलखती हुई नारी, लड़ते हुए परिवार को देखना भी अशुभ होता है। सुबह उठकर सबसे पहले भगवत दर्शन करें। बैडरूम में नारायण के चरण दबाती हुई लक्ष्मीनारायण का चित्र, ड्राइंग रूम में सुदामा के चरण धोते हुए श्रीकृष्ण का चित्र लगाएं। उन्होंने बताया कि जो महाशिवरात्रि को चार प्रहर की पूजा कर लेता है, उसे वर्षभर की पूजा का फल मिल जाता है। 
श्याम बाबा की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि बर्बरीक को स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने दीक्षा दी और वे खाटू श्याम बने। कुबेर के कोषाध्याक्ष खाटू श्याम बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं आता है, वे सबकी झोली भर देते हैं। उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर सबसे बड़ा तीर्थ है। मानसरोवर यात्रा करने के बाद धरती के सारे तीर्थों का पुण्य हासिल हो जाता है
बेटी परहित में पूरा जीवन लगा देती है,इसलिए बेटी को खूब प्यार करो
कथा पंडाल में कौशिक महाराज ने कहा कि बेटा और बेटी में के साथ पक्षपात नहीं करना चाहिए। बेटी दो कुल का नाम रोशन करती है उन्होंने कहा कि पिता के घर से बेटी की डोली उतना चाहिए, अर्थी नहीं उठना चाहिए। अर्थी उठना अशुभ होता है। बेटी घर की शान होती है। बेटी पहले घर में मां का डांट खाती है, फिर पति और मां के रूप में बच्चों की। फिर भी वह घर को स्वर्ग बनाने में लगी रहती हैं। राजा जनक और सीता माता का जिक्र करते हुए कौशिक महाराज ने कहा कि सीता जी ने त्याग ओर वह तपस्या की जिससे दोनों कुलों का नाम रोशन हुआ। इसलिए हमेशा बेटी से खूब प्यार करो। बेटे की तरह ही बेटी के साथ व्यवहार करो क्योंकि बेटी परहित में अपना पूरा जीवन लगा देती है। धरती की सुंदरता बेटी से है।
इस मौके पर पुरूषोत्तम भार्गव, नरेंद्र सरिता शर्मा, शशि मनोज शर्मा, चंद्रकांता उप्पल, उमेश उप्पल, रामबाबू अग्रवाल, अवधेश  कौरव सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।