सत्कर्मों के साबुन से साफ करें अंतकरण:स्वामी विद्यानंद

May 20 2025

ग्वालियर। मनुष्य के भीतर राग द्वेष की गंदगी भरी है, जो उसके कर्मों को बांधती है। मनुष्य कर्मों के बंधन से मुक्त तो होना चाहता है,लेकिन माया प्रबल है, शुद्ध कर्म करोगे, तो ही अंत:करण शुद्ध होगा और प्रीति का भाव जाग्रत होगा। सत्कर्मों के साबुन से अंतकरण साफ हो जाएगा और भीतर जमा विकारों का मल साफ हो जाएगा। यह विचार बरूमाल पीठ के महामंडलेश्वर स्वामी विद्यानंद सरस्वती ने सनातन धर्म मंडल में भगवान चक्रधर के सानिध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत के प्रसंगों पर आधारित प्रवचन के दौरान व्यक्त किए।
स्वामी विद्यानंद ने श्रद्धालुओं के समक्ष अमृत वर्षा करते हुए कहा कि अच्छे कर्म करते हुए जीवन जीए। दूसरों के प्रति राग-द्वेष न रखें। अक्षय शांति के लिए शुभ कर्म करते हुए मन को छोटे अबोध बालक जैसा बना लें, तो काम क्रोध, लोभ, मोह से मुक्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब हमारी आशक्ति ईश्वर में होने लगेगी तो फिर संसारी लोगों के प्रति राग द्वेष स्वत: ही समाप्त होने लगेगा। जिस प्रकार एक छोटा बालक सभी को देखकर मुस्कराता है, उसी प्रकार बाल भाव पैदा होने से संसार के सभी प्राणियों के प्रति प्रेम का भाव उत्पन्न हो जाएगा।
 इस मौके पर सनातन धर्म मंडल के अध्यक्ष विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष हरीशंकर सिंह, प्रधानमंत्री रमेश गोयल लल्ला, राजेश वंसल, राकेश वंसल, नारायण ब्रजवासी, सुरेश वंसल, आरके खेतान, सुनील अग्रवाल, सुमन सिंघल, प्रमोद अग्रवाल, अरविंद त्रिपाठी, स्वामी गोपालानंद, रामप्रकाश गौतम, सुनील शर्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालु श्रोता मौजूद रहे।