हमारे विचार और अच्छे संस्कारों से समाज में पहचान होती है-अरिहंत शास्त्री

May 19 2025

ग्वालियर। भारतीय जैन मिलन क्षेत्रीय क्रमांक 2 के अंतर्गत युवा जैन मिलन नेमिनाथ शाखा लश्कर के तत्वाधान में सात दिवसीय जैन बाल युवा संस्कार शिक्षण शिविर के दूसरे दिन सोमवार को दानाओली स्थित दिगंबर पार्श्वनाथ खंडेलवाल नया जैन मंदिर में सुबह ही बच्चे जल्दी पहुंचकर भगवान जिनेंद्र की पूजन विधि की शिक्षा ली। शिविर में बच्चे जैन धर्म की शिक्षा ग्रहण कर रहे है। विद्वान गणो से बच्चे धर्म की विभिन्न गतिविधियों को बारीक से अध्ययन की सीखा ले रहे है।
शिविर में अरिहंत जैन शास्त्री ने बालक बालिकाओं को धर्म कि शिक्षा देते हुए कहा कि माता पिता का फर्ज बनाता है कि बच्चों को सुबह की बेल मे जल्द उठकर सबसे पहले देव दर्शन करना चाहिए। साथ ही बच्चो को आपने माता पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए। इससे की आप में पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता रहता है। इस संसार में सभी दु:खों से भयभीत रहते है। इसलिए प्रभू और मुनिराज धार्मिक संस्कारों की ऐसी शिक्षा देते कहते है कि इन भव्य जीवो में अगर अपना उद्धार चाहते हो तो मन को स्थिर करके जिनवाणी की आराधना करो। जिनवाणी का अध्ययन करने से हमारे विचार और अच्छे संस्कारों से समाज में एक विशाल पहचान होती है। जब हमारे संस्कार अच्छे हो तो सामने वाला व्यक्ति भी आपन आदर्श कर सम्मान करेगा। इस शिविर के निर्देशक रवि जैन ने बच्चों से धार्मिक प्रश्न कर उनके जवाब सही देने बालक बालिकाओं को पुरुस्कार देकर सम्मानित किया। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि जैन बाल युवा संस्कार शिक्षण शिविर में 300 बालिका बालिकाएं व महिलाएं रोजान जैन सिद्धांत ज्ञान व संस्कार की शिक्षा ग्रहण कर रही है। बच्चो के साथ आने वाले पालक अध्यात्म के विषय में ज्ञान प्राप्त कर रहे है। शिक्षा देने वाले विद्वान डॉ विजय जैन पौड़ की शिक्षा, अरिहंत शास्त्री जैन किशोरी वर्ग, मंजू जैन दूसरे बाल भाग, आरती जैन भाग 1 के साथ बाल मौखित कक्षाएं सभी संस्कार जैन समाज के विद्वानगण द्वारा शिक्षा दी जा रही है।