सफलता हासिल करने का राज कर्म और पुरुषार्थ है: विद्यानंद सरस्वती

May 19 2025

ग्वालियर। श्रीभाव भावेश्वर तीर्थ बरूमाल के महामंडलेश्वर स्वामी विद्यानंद सरस्वती ने कहा है कि सफलता हासिल करने का राज कर्म और पुरुषार्थ है। अकेला पुरुषार्थ सार्थक नहीं होता जब तक उसमें आपके किए हुए कर्म नहीं जुड़ते। उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म दुर्लभ है लेकिन इसे राग द्वेष और अभिमान से पशु के समान कर दिया है। अच्छे कर्म नहीं करेंगे तो जीवन नर से नरकीय हो सकता है। जब पुण्य उदय होता है तब सत्संग मिलता है। ईश्वर ने मनुष्य बनाकर भेजा लेकिन हम अपने कर्मों से इसे पशुओं के समान बना रहे हैं। सुबह किए चक्रधारी के दर्शन दीप प्रज्वलन कर सत्संग का शुभारंभकरते उन्होंने कहा कि सनातन मंडल से ही मैंने ग्वालियर आने की शुरुआत की थी। बीच में अंतराल रहा और एक बार फिर सनातन धर्म मंडल में आया हूं। सुबह भी सनातन धर्म मंडल में पहुंचकर स्वामी विद्यानंद सरस्वती ने भगवान चक्रधारी के दर्शन किए। वे यहां सनातन धर्म मंडल में प्रारंभ हुए छह दिवसीय श्रीमद्भागवत पर व्याख्यान दे रहे थे।
इस मौके पर सनातन धर्म मंडल के अध्यक्ष विजय गोयल, हरीशंकर सिंह, प्रधानमंत्री रमेश गोयल लल्ला, राजेश बंसल, राकेश बंसल, नारायण ब्रजवासी, सुरेश बंसल, आरके खेतान, सुनील अग्रवाल, सुमन सिंघल, प्रमोद अग्रवाल, अरविंद त्रिपाठी, स्वामी गोपालानंद, रामप्रकाश गौतम, सुनील शर्मा, विपिन शर्मा आदि श्रद्धालु श्रोता मौजूद रहे।