कलेक्टर रुचिका चौहान और निगमायुक्त संघ प्रिय ने जलविहार में श्रमदान किया

May 18 2025

ग्वालियर। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत रविवार को कलेक्टर रुचिका चौहान एवं निगमायुक्त संघ प्रिय के नेतृत्व में जल विहार तालाब एवं फूलबाग बावड़ी के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर  कलेक्टर रुचिका चौहान और निगमायुक्त संघ प्रिय ने जलविहार में श्रमदान किया। इस अवसर पर निगम के अधिकारी और कर्मचारियों के अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग अपने-अपने बैनर लेकर आए थे।बाद में निगम कर्मचारियों ने यहां सफाई अभियान चलाया। 
इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि शहर के प्रमुख पार्कों में स्वच्छता को लेकर एक प्रतिस्पर्धा आयोजित की जाए, जिसमें सर्वश्रेष्ठ पार्क के लिए पुरस्कार राशि भी दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे लोग पार्कों से जुडेंगे और पार्कों में स्वच्छता के लिए अपना समय भी देंगे। रविवार सुबह 7 बजे फूलबाग मैदान पर निगम के जनसंपर्क कार्यालय के पास स्थित पुरानी बावड़ी के जीर्णोद्धार कार्य की शुरुआत के साथ यह अभियान प्रारंभ हुआ। इस कार्य का औपचारिक शुभारंभ होने के बाद सभी अधिकारी और कर्मचारी तथा विभिन्न संगठनों के लोग जल विहार पहुंचे।
कलेक्टर और निगमायुक्त ने जल विहार के पानी में जमा गाद और गंदगी की सफाई करते हुए यहां सफाई अभियान की शुरुआत की। वहीं यहां काफी संख्या में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी पहुंचे थे। औपचारिक शुभारंभ के बाद यहां निगम कर्मचारी जलविहार से गंदगी निकालने में जुट गए। 
इसके बाद कलेक्टर और निगमायुक्त इटालियन गार्डन पहुंचे। यहां उन्होंने पुरानी बावड़ी को देखा। जिस दौरान वे यहां पहुंचे तब इस कुए में जिस पाइप से पानी डाला जा रहा था वह कई जगह से फटा हुआ होने से यहां फव्वारे चल रहे थे। हालांकि किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। आईईसी के नोडल अधिकारी मुकेश बंसल ने कर्मचारियों से कलेक्टर के आने से पहले इसे बंद करने के लिए प्रयास किए लेकिन तब तक अधिकारी यहां आ चुके थे।
इटालियन गार्डन में जहां लोग शुद्ध वायु लेने के लिए आते हैं वहीं यहां पर गाजर घास भी खड़ी हुई है, जोकि वातावरण को प्रदूषित करती है और यह बहुत ही घातक होती है। वहीं पार्क में कचरे के ढेर भी लगे हुए थे। सफाई अभियान के दौरान गाजर घास की कटाई तो शुरु हो गई।
इटालियन गार्डन में एक ओर जहा फव्वारे बंद पड़े हुए है वहीं बावड़ी को भरने के लिए डाला गया पाइप फूटा होने से उसमें फव्वारे फूट रहे थे। यहां के फव्वारे कभी कभार ठीक होते हैं फिर वे बंद हो जाते हैं।