चंबल के स्नान से मिलता है गौदान का पुण्य: कौशिक महाराज
May 17 2025
ग्वालियर। माता गंगा पतितों को पावन कर देती हैं, तो माता चंबल की भी अद्भुत महिमा हैं। चंबल में स्नान करने से गौदान का पुण्य मिलता है। इसका पानी इतना शुद्ध है कि मोती की तरह चमकता है। यह विचार पुराण मनीषी कौशिक महाराज ने फूलबाग शिवलोक में आयोजित हो रही शिवमहापुराण की कथा के चौथे दिन शनिवार को व्यक्त किए। शुभारंभ अवसर पर कथा संयोजक विधायक सतीश सिंह सिकरवार ने व्यासपीठ का पूजन किया। लाल टिपारा स्थित गौशाला के संत ऋषभदेवानंद महाराज इस मौके पर मंच पर विराजमान रहे।
कौशिक महाराज ने नदियों की महिमा का बखान करते हुए बताया कि ऐसे तीर्थों में जरूर जाएं, जहां नदियां बहती हैं। सरस्वती के किनारे वास करने से ब्रह्म पद की प्राप्ति होती है। गंगा नदी सौ मुख वाली है। इसके किनारे वास करने से पुरखों का तारण हो जाता है। नदियों को गंदा करने वाले लोग अगले जन्म में होते हैं गूंगे बहरे उन्होंने बताया कि नर्मदा के 24 मुख हैं। इसके किनारे वास करते हैं, श्रीगणेश उनकी रक्षा करते हैं। नर्मदा के जल से भगवान भोले का अभिषेक करने से अकाल मृत्यु नहीं होती है। कलयुग के अंत में सभी नदियां सूख जाएंगी, लेकिन 45 करोड़ वर्ष पहले धरा पर सबसे पहले आईं नर्मदा मैया प्रलय होने पर भी नष्ट नहीं होंगी। गोदावरी के 21 मुख हैं, जिनके किनारे वास करने सेे रुद्रलोक प्राप्त होता है। 18 मुख की कृष्णावैणी के किनारे भगवान मल्लिकार्जुन विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि नदियां जीवनदायनी हैं, इन्हें गंदा न करेें,जो नदियों को गंदा करते हैं, वे अगले जन्म में गूंगे बहरे होते हैं।
उन्होंने बताया कि सतयुग में 12 साल तीर्थ करने से जो फल मिलता है वो कलयुग में सिर्फ 24 घंटे तीर्थ में बिताने से मिल जाता है, इसलिए साल में एक बार तीर्थ दर्शन जरूर करना चाहिए और ऐसे तीर्थों में जरूर जाएं, जहां नदियां बह रहो हों। उन्होंने कहा कि शिवमहापुराण की कथा का पुण्य वेद के अनुष्ठान के समान होता है, इसलिए जब भी जहां भी अवसर मिले, कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। नित्य पाठ करें, लेकिन यदि किसी दिन छूट जाएं तो अगले दिन डबल करने से प्रायचित्त हो जाता है। माह में एक बार उपवास जरूर करें। घर की जिम्मेदारियों से मुक्त होने के बाद 10.30 महीने तीर्थ में बिताएं। युवा भी साल में कुछ दिन तीर्थाटन जरूर करें।
कौशिक महाराज ने कहा कि ब्राह्मण, वेद, गाय और अग्नि ये चारों भगवान के मुख से प्रकट हुए हैं, इसलिए नित्ययज्ञ एवं गुरूपूजा के साथ ब्राह्मण को भोजन जरूर कराना चाहिए। यज्ञ करने वाले प्रकृति के ऋण से मुक्त हो जाता है। प्रकृति से हम जितना लेते हैं, उसे वापस जरूर करना चाहिए, अन्यथा वह खुद ही ऐसा कर लेती है। इस मौके पर कथा परीक्षत नरेंद्र शर्मा, मनीष शर्मा, उमेश उप्पल, राम पांडे, रामबाबू अग्रवाल, दिनेश पाराशर सहित हजारों श्रद्धालु श्रेता मौजूद रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









