सुख, शांति धन से नहीं, प्रेम और संतुलन से मिलती है

May 13 2025

ग्वालियर। आज के समय में धन-दौलत हर किसी के पास है, पर फिर भी लोग सुख और शांति ढूंढ़ते फिरते हैं। क्योंकि सुख और शांति धन से नहीं, अपने अंदर के प्रेम और संतुलन से मिलती है। अगर आपके घर में प्रेम और आनंद है, तो फिर बाहर जाने की कोई आवश्यकता नहीं। प्रेम वो तत्व है जो बांटने से बढ़ता है। जितना आप देंगे, उतना ही मिलेगा। रिश्तों में मधुरता लानी है तो प्रेम देना और लेना ही एकमात्र उपाय है। उक्त बात बीके गिरीश भाई ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के माधवगंज स्थित प्रभु उपहार भवन में वाह जिंदगी वाह के तीन दिवसीय कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी को संबोधित करते हुए कही।
कार्यक्रम में बीके कमल ने कहा कि यदि शरीर स्वस्थ है, आत्मा शांत है और मन सकारात्मक है। तो जीवन भी स्वर्ग के समान हो जाता है। इसलिए जीवन का मूल मंत्र है स्वस्थ शरीर, प्रेममयी हृदय और शांत आत्मा। प्रेम दो, प्रेरणा दो, डराओ मत समझाओ। क्योंकि जो सच्चा है, वह आत्मा है। और आत्मा को चाहिए सिर्फ परमात्मा से जुड़ाव। 
कार्यक्रम में केंद्र प्रभारी बीके आदर्श दीदी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आध्यात्मिकता के माध्यम से व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत कर न केवल हर कार्य में सफलता प्राप्त कर सकता है, बल्कि जीवन की हर चुनौती का सामना करते हुए उसे सार्थक एवं श्रेष्ठ बना सकता है।