आत्म-बल हमें जीवन की चुनौतियों से लडऩे की शति देता है: कर्नल सती

May 11 2025

ग्वालियर। स्व-सशतीकरण का अर्थ है- स्वयं को समझना, अपनी कमजोरियों पर विजय पाना और अपनी आंतरिक शतियों का विकास करना। इसके लिए अपने विचारों पर नियंत्रण प्राप्त करना आवश्यक है, जब मन शांत होता है, तो निर्णय शति, एकाग्रता और आत्म-विश्वास बढ़ता है। यही आत्म-बल हमें जीवन की चुनौतियों से लडऩे की शति देता है। जो जीवन के हर क्षेत्र में सफलता का मूल है। उक्त बात कर बीके कर्नल बीसी सती ने पुलिस ट्रेनिग स्कूल तिघरा में कही। कार्यक्रम में पीटीएस तिघरा के पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी एवं पुलिस के जवान उपस्थित थे।
इसके साथ ही ग्रुप सेंटर सीआरपीएफ में भी उन्होंने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों के साथियों को शारीरिक पराक्रम के साथ साथ मानसिक दृढ़ता और भावनात्मक संतुलन कि भी जरुरत है। लगातार तनाव, अनिश्चितता, विपरीत परिस्थितियाँ और मानसिक दबाव हमारी आंतरिक शति की परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में हमें स्वयं को सशक्त बनाने के लिए मन को शक्तिशाली बनाने की आवश्यकता है। यदि हम राजयोग मैडिटेशन का निरंतर अयास करें तो हम परमात्म शतियों से आत्मा को सशत कर सकते हैं। जब हम स्वयं को अंदर से सशत महसूस करते हैं, तभी हम देश और समाज की रक्षा पूरी निष्ठा और मनोबल के साथ कर सकते हैं। 
परिस्थितियां निश्चित ही हमारी निर्णय शक्ति को कमजोर करती है। जिसका प्रभाव हमारे जीवन के हर व्यवहार पर पड़ता है इसीलिए आवश्यकता है कि हम स्वयं को जितना शारीरिक रूप से फिट एंड अलर्ट रखते है उतना ही हमें मानसिक रूप से भी स्वस्थ बनाना होगा। कार्यक्रम में कमांडेंट पीसी गुप्ता, डिप्टी कमांडेंट दिलाबर सिंह सहित अनेक पुलिस के जवान उपस्थित थे। 
ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर हुए कार्यक्रम में कैप्टन बीके सती ने कहा कि आध्यात्मिकता और राजयोग मेडिटेशन मानसिक स्वास्थ्य को सशत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब हम राजयोग मैडिटेशन के अयास द्वारा आत्मचिंतन कर अपने भीतर की शांति का अनुभव है, तो मन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है और विचार अधिक स्पष्ट और शतिशाली बनते हैं। राजयोग मेडिटेशन न केवल तनाव और नकारात्मकता को कम करता है, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता को भी विकसित करता है, जिससे व्यक्ति आत्मविश्वास के साथ जीवन के कठिन एवं चुनौतीपूर्ण समय में फैसले ले सकता है।