आचार्यश्री सुबल सागर गाजे-बाजे के साथ मंगल प्रवेश

May 06 2025

ग्वालियर। आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ का मंगलवार को मंगल प्रवेश दिगम्बर जैन बीसपंथ चम्पाबाग बड़ा मंदिर में हुआ। आचार्यश्री की मंगल प्रवेश यात्रा गाजे-बाजे के साथ मंदिर प्रबंधक कमेटी और सकल जैन समाज द्वारा निकाली गई। मंगल प्रवेश यात्रा सुबह 8 बजे से इंदरगंज जैन मंदिर से गाजे बाजे के साथ निकाली गई। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज सहित नौ साधुओं का मंगल प्रवेश कराया गया। मंगल प्रवेश यात्रा इंदरगंज जैन मंदिर से प्रारंभ होकर पुराना हाईकोर्ट रोड, ऊंट पुल, पाटनकर चौराहे, गस्त का ताजिया, नई सडक़ से होते हुए दानाओली स्थित चंपाबाग जैन मंदिर पहुंची। मंगल प्रवेश यात्रा में महिला केसरिया साड़ी और पुरुष सफेद परिधानों सम्मिलित थे। जगह-जगह भक्तों ने आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ का पद प्रक्षालन और आरती की। 
धर्म ही दिखाता है जीने की राह
व्यक्ति को जीवन जीने के लिए भोजन की तरह धर्म की आवश्यकता होती है। कोई भी मनुष्य बिना धर्म के नहीं रह सकता है। जो बिना धर्म के रहता है उसका जीवन पशुओं के समान होता है क्योंकि वह धर्म ही है जो मनुष्य को जीने की राह दिखाता है। धर्म से अलग होकर जीने का अर्थ है व्यक्ति अपने मूल स्वभाव से अलग होकर जीने का प्रयास कर रहा है। धर्म ही मनुष्य को बताता है कि किन परिस्थितियों में उसे किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए। किसी भी तत्व को उसके स्वभाव से अलग नहीं किया जा सकता।