भगवान को किसी भी प्रकार का अभिमान प्रिय नहीं है: घनश्याम शास्त्री

Apr 29 2025

ग्वालियर। दौलतगंज राजा बाक्षर की गोठ, राजा बादशाह मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन भागवत आचार्य पंडित घनश्याम शास्त्री महाराज ने बताया कि भगवान को किसी भी प्रकार का अभिमान प्रिय नहीं है, न बल का, न धन का, न तन का, न ज्ञान का, और न ही पद का। भक्ति का मार्ग नम्रता और विनम्रता से भरा हुआ है। भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता। जो सच्चा भक्त होता है, वह सदा अपने को दीन और तुच्छ मानता है और प्रभु के चरणों में समर्पित रहता है।
इंद्र का अभिमान तोडऩे के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त ब्रजवासियों से कहा कि वे इंद्र की पूजा के स्थान पर गिरिराज पर्वत की पूजा करें। जब इंद्र ने देखा कि उसकी पूजा बंद हो गई है, तो उसने क्रोधित होकर मूसलधार वर्षा भेजी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर संपूर्ण गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सात दिन तक समस्त ब्रजवासियों को सुरक्षित रखा। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने इंद्र का घमंड चूर कर दिया और संसार को यह संदेश दिया कि ईश्वर के सामने किसी भी प्रकार का अभिमान टिक नहीं सकता।