संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं अस्त-व्यस्त

Apr 25 2025

ग्वालियर। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा की जा रही हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से चरमरा गई हैं। पैथोलॉजी में जांच नहीं हो पा रही, मरीजों का इलाज नहीं हो रहा, विश्व टीकाकरण सप्ताह के लिए कर्मचारी नहीं मिल रहे, टीबी के रोगियों को दवा नहीं मिल रही। इन सबके बीच संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश के उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला से मुलाकात कर उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए संविदा नीति 2023 लागू करने की मांग की है। संविदाकर्मियों को आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही नेशनल हेल्थ मिशन की एमडी से बात कर इस मामले में ठोस व उचित निर्णय लिया जाएगा।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संविदा नीति-2023 लागू करने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को हड़ताल का चौथा दिन था, और इससे सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं बुरी तरह से पटरी से उतर गई हैं। सबसे ज्यादा असर राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर पड़ रहा है। गत रोज से शुरु हुए विश्व टीकाकरण सप्ताह को अमलीजामा पहनाने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारी ही नहीं मिले। क्योंकि यह काम पूरी तरह से संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी ही संभालते हैं।
एएनएम व सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) ने अपना समर्थन दे दिया है, जिससे कोई टीकाकरण कार्यक्रम में पहुंचा ही नहीं। यह बात भोपाल तक पहुंची तो वहां से सीएमएचओ को निर्देश दिए गए कि वह आंगनबाड़ी, आशा कार्यक र्ता व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग लेकर कार्यक्रम को पूरा करें।
प्रति माह 9 व 25 तारीख को हाई रिस्क में शामिल गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए जिले भर में विशेष क्लीनिक संचालित की जाती हैं। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल के कारण इस पर बुरा प्रभाव पड़ा है। अभी तक जो जानकारी मिली है उसके अनुसार पंत नगर, बहोड़ापुर, हेमसिंह की परेड सहित कुछ और स्थानों पर एचआरपी क्लीनिक शुरु नहीं हो सकी हैं।
संविदाकर्मियों की हड़ताल को देखते हुए हजार बिस्तर अस्पताल प्रबंधन से स्टाफ की मांग की गई। लेकिन वहां से यह कहते हुए स्टाफ देने से मना कर दिया कि हमारे यहां तो वैसे ही मरीज ओवरलोड हैं, ऐसे में हम अपने कर्मचारी दूसरे कामों में नहीं लगा सकते।
फार्मासिस्ट भी हुए शामिल
हड़ताल को अब फार्मासिस्टों का समर्थन भी मिल गया है। सरकारी अस्पतालों में तैनात 42 फार्मासिस्ट ने काम बंद कर हड़ताल में बैठने की सहमति प्रदान की है। इससे अब दवा वितरण पर भी असर पड़ेगा। जिला क्षय रोग के दफ्तर का ताला खुल नहीं पा रहा। ऐसे में टीबी के मरीजों को अलग परेशानी उठानी पड़ रही है।