सार्थक एप व्यवहारिक नहीं, इसे बंद कराया जाए

Apr 17 2025

ग्वालियर। सार्थक एप से उपस्थिति दर्ज कराने के सीएमएचओ के आदेश को लेकर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। कर्मचारियों ने इस आदेश को अव्यवहारिक बताया है और अपनी परेशानी से कलेक्टर को अवगत कराने के लिए ज्ञापन सौंपा है। कर्मचारियों का कहना है कि बहुत से कर्मी ऐसे हैं जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है और वह उसे चलाने में सक्षम नहीं हैं। 
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में नेटवर्क का इश्यु हमेशा बना रहता है। ऐसे तो कर्मचारी अपनी उपस्थिति दर्ज ही नहीं करा सकेंगे, जिससे उनका वेतन नहीं निकलेगा।
सीएमएचओ डॉ. सचिन श्रीवास्तव के पास लगातार इस तरह की शिकायतें पहुंच रही थी कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी समय पर अस्पताल व अन्य चिकित्सकीय संस्थानों में नहीं पहुंच रहे। इससे तमाम योजनाएं ठीक ढंग से क्रियान्वित नहीं हो पा रही। इस शिकायत को लेकर सीएमएचओ ने जब सार्थक एप से उपस्थिति का चार्ट निकलवाया तो शिकायत सही पाई गई, क्योंकि कर्मचारियों के साथ-साथ कई चिकित्सक भी अपनी ड्यूटी से नदारद मिले थे। 
ऐसी हालत देखकर उन्होंने आदेश जारी कर दिया कि डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मचारियों का वेतन सार्थक एप पर उनकी उपस्थिति के अनुसार ही प्रदान किया जाएगा। मतलब यह कि अगर सार्थक एप 20 दिन की उपस्थिति दर्शा रहा है तो फिर इतने दिन का वेतन ही दिया जाएगा। इस आदेश के बाद स्वास्थ्य कर्मचारी लामबंद हो गए और अपनी परेशानी बताने कलेक्टर के पास पहुंचे।
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के महामंत्री रनवीर सिंह सिकरवार, संभागीय अध्यक्ष महादेव सिंह गोयल, जिला अध्यक्ष महेन्द्र कुमार जैन, महामंत्री दिनेश सिंह राठौर सहित अन्य कलेक्टर के पास पहुंचे और ज्ञापन दिया। ज्ञापन के माध्यम से बताया कि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के ऐसे बहुत से कर्मचारी हैं जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या रहती है, नाइट ड्यूटी के बाद ऑफ का एप्शन एप नहीं है। इसलिए यह आदेश चिकित्सकों के लिए ही लागू हो, कर्मचारियों पर नहीं।