डॉ. बाबा साहब अंबेडकर का मानना था कि संस्कृत राष्ट्रभाषा बने-मनीष राजौरिया

Apr 14 2025

ग्वालियर। अनुसूचित जाति के उत्थान के लिए समर्पित विचार प्रवाह अध्ययन एवं शोध केंद्र के तत्वावधान में त्रैमासिक व्याख्यान के डॉ साहब का भाषाई चिंतन विषय पर विवेकानंद सभागार राष्ट्रोत्थान न्यास भवन नई सडक़ पर आयोजन किया गया। 
डॉ साहब का भाषाई चिंतन विषय पर समाजसेवी मनीष राजौरिया ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. बाबा साहब अंबेडकर का मानना था कि संस्कृत अगर राष्ट्रभाषा बनी तो, समाज में अपनी संस्कृति को समझने का मौका मिलेगा। उनका आग्रह मातृभाषा में बातचीत का था। वे मराठी भाषी होने के बाद भी संस्कृत और हिंदी के पक्षधर थे। 
श्री राजौरिया ने त्रैमासिक व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहब जानते थे कि भाषा विवाद भारत को मध्ययुगीन स्थिति में पहुंचा देगा। वे भाषा को राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखने के पक्षधर थे। उन्होंने कहा कि डॉ साहब का मानना था कि संस्कृत सब भारतीय भाषाओं की जननी है । उन्होंने कहा कि डॉ. साहब का भाषाई चिंतन की प्रासंगिकता आज और बढ़ गई है। 
इस अवसर पर धानुक समाज के संभागीय अध्यक्ष वृंदावन कोठारी ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। इससे पूर्व अतिथियों ने बाबा साहब डॉ. अंबेडकर एवं भारत माता के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर द्वीप प्रज्जलन किया गया।
विचार प्रवाह केन्द्र का परिचय राजेश कटारे ने दिया। अतिथि परिचय  रविकांत बनाफल ने दिया। अतिथियों का स्वागत श्रीमती मोनिका घई एवं श्रीमती वर्षा सुमन ने किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अर्चना सगर ने किया। कार्यक्रम के संयोजक रामसेवक कटारे ने आभार व्यक्त किया। विचार प्रवाह अध्ययन एवं शोध केन्द्र ग्वालियर के संयोजक सुधीर शर्मा ने आगामी कार्यक्रम की जानकारी दी।
इस अवसर पर डॉ. सुखदेव मखीजा, डॉ. रवि अंबे, जवाहर प्रजापति, रमेशचंद्र सेन, श्रीमती ज्योति सगर, रमा जाटव, श्रीमती ज्योति राजोरिया, अर्जेन्द्र छांवरिया, विनोद अष्टैया, संतोष गोडयाले, चंद्रशेखर मालवीय, डॉ. अशोक वर्सेना, अक्षय सिंह, गब्बर जाटव, शिवम सौलंकी, प्रमोद चौहान, वृंदावन लुढेले सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।