संतों के विरोध पर लक्षचण्डी महायज्ञ की अनुमति दी

Apr 10 2025

ग्वालियर। चंबल की प्रगति, विकास एवं विश्व कल्याण के लिए 1008 लक्षचण्डी महायज्ञ का आयोजन 14 से 21 अप्रैल तक मेला मैदान में किया जाना है। प्रशासन द्वारा इस महायज्ञ के लिए अनुमति नहीं देने पर संत समाज ने विरोध करना शुरू कर दिया। इसके उपरांत गत देर शाम को प्रशासन द्वारा लक्षचण्डी महायज्ञ के लिए अनुमति जारी कर दी गई। उल्लेखनीय है कि लक्षचण्डी महायज्ञ का आयोजन 14 अप्रैल से मेला मैदान में किया जाना है।
इस महायज्ञ के लिए अनुमति नहीं मिलने पर गम रोज एक पत्रकार वार्ता के माध्यम से स्वामि वैराग्यानंद गिरी महाराज, स्वामी वेदमूर्तिनंद सरस्वती महाराज, पाताल बाबा, बरूआ बाबा आदि संतो ने अपना विरोध करना शुरू कर दिया। संत समाज का कहना था कि यह आयोजन किसी स्वार्थ सिद्धी के लिए नहीं है बल्कि विश्व कल्याण के लिए किया जा रहा है। इसकी सूचना हमने प्रशासन को पहले ही दे दी है। 
नौ मार्च को हमारी प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात भी हो गई है, इसके बावजूद भी हमें इस महायज्ञ के लिए अनुमति नहीं मिली है। संतो ने कहा कि हमें राष्ट्र कल्याण के यज्ञ करने की आवश्कता है जो हम करने जा रहे हैं। राष्ट्र की उन्नति के लिए सबसे बड़ा कर्म यज्ञ ही है। चर्चा के दौरान संतों ने कहा कि अगर हमें अनुमति नहीं मिली तो हमें मजबूरन परशुराम का रूप धारण कर लेंगे और यज्ञ करेंगे।
मिर्ची बाबा कहने पर भडक़े वैराग्यानंद गिरी
पत्रकार वार्ता के दौरान जब स्वामि वैराग्यानंद गिरी महाराज को मिर्ची बाबा के नाम से संबोधित किया तो उन्होंने कहा कि आप लोग मेरा नाम मिर्ची बाबा लेकर संबोधित नहीं करें। क्योंकि कोई प्रमाण नहीं है कि मैं मिर्ची बाबा हूं। आप पहले प्रमाण दें तभी आप मिर्ची बाबा कहें, नहीं तो मैं आप पर मानहानि का दावा कर दूंगा। आप भारत के किसी भी संत को अपनी मर्जी से कोई भी नाम नहीं दे सकते हैं। आप पर इसका कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरा नाम महामण्डलेश्वर स्वामि वैराग्यानंद गिरी महाराज पंचायती निरंजनी अखाड़े के नाम से जाना जाता है।