कलश यात्रा के साथ राघव ऋषि की कथा आरंभ

Mar 21 2025

ग्वालियर। ऋषि सेवा समिति के द्वारा माधव मंगल पैलेस में आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा में माता बहनें जल से भरे हुए कलश सिर पर धारण किए पीले वस्त्रों में शामिल हुईं। इस दौरान बग्घी पर सवार राघव ऋषि एवं दंदरौआ महाराज का शहरवासियों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। 
कलश यात्रा नयाबाजार स्थित करौली मंदिर से प्रारंभ होकर दालबाजार, जयेंद्रगंज होते हुई कथा स्थल पर पहुंची। कथा यजमान गोयल परिवार श्रीमद्भागवत की पोथी सिर पर लेकर चला। कलश यात्रा के दौरान 21 ढोल वादक एवं विंटेज कार पर सवार बजरंगवली की झांकी शहरवासियों के आकर्षण का केंद्र रही। 
अल्पाहार करके सुने कथा: दंदरौआ महाराज
दंदरौआ हनुमान मंदिर के महंत रामदास महाराज ने कहा कि भक्तों का प्रेम हमेें यहां खींच लाया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि अगले सात दिन सब काम छोडक़र कथा का श्रवण करें, क्योंकि आपके बाकी सभी काम तो भगवान की कृपा से हो ही जाएंगे। अल्पाहार करके कथा सुने, जिससे आलस नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि माता बहिनें भी हनुमानजी की पूजा कर सकती हैं। वे सभी का दुख दर्द दूर कर देते हैं। वे असाध्य बीमारियों क ो भी ठीक कर देते हैं, इसलिए उन्हेंं डॉक्टर हनुमान कहते हैं।
कथा के प्रथम दिवस राघव ऋषि ने कथा का महात्म बताते हुए कहा कि कथा के माध्यम से सच्चिदानंद प्रभु की प्राप्ति होती है, जो आनंद हमारे भीतर है उसे जीवन में किस प्रकार प्रकट करें यही भागवत शास्त्र सिखाता है। जैसे दूध में मक्खन रहता है फि र भी वह दिखाई नहीं देता,लेकिन मंथन करने पर मिल जाता है। इसी प्रकार मानव मन को मंथन करके आनंद प्रकट करना है। मनुष्य जीवन का लक्ष्य है। परमात्मा से मिलना उसका जीवन सफ ल है, जिसने प्रभु को प्राप्त किया।
  ऋषि सेवा समिति के संयोजक रामबाबू अग्रवाल, चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल, आनंद मोहन अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, प्रमोद गर्ग,उमेश उप्पल, संजय शर्मा, अंबरीष गुप्ता, देवेंद्र तिवारी, हरिओम मिश्रा, रामप्रसाद शाक्य, चंद्रप्रकाश शुक्ल, बद्रीप्रसाद गुप्ता, उदय प्रकाश चित्तौडिय़ा, अमित शिवहरे, पंकज श्रीवास्तव, विष्णु पहारिया, नरेंद्र सिंहल, अनिल पुनियानी सहित आदि अनेक गणमान्य भक्तों ने प्रभु की भव्य आरती की। कथा में राघव ऋषि के सुपुत्र सौरभ ऋ षि ने गौरी के नंदन की का सुमधुर गायन किया तो भक्त भाव विभोर हो गए।