होली मिलन में फागुन लोकगीते ने भरा रंग

Mar 19 2025

ग्वालियर। संगीत के वाद्य वृदों से सजा मंच, जहां शास्त्रीय गायन, वादन के साथ नृत्य का अद्भुत मेल देखने और सुनने को मिला, वहीं फाग गायन ने माहौल में और रंग भर दिया। साथ ही कलाकारों ने नाटक के माध्यम से नशा मुक्ति का संदेश दिया।
संस्कार भारती, राष्ट्रोत्थान न्यास और शरद मेहरोत्रा स्मृति न्यास के संयुक्त तत्वावधान में नई सडक़ स्थित राष्ट्रोत्थान न्यास भवन के तराणेकर सभागार में आयोजित होली मिलन कार्यक्रम में शहर के युवा कलाकारों ने मंच से अपनी प्रतिभा का परिचय देकर कला रसिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरूआत मां भारती के चित्र पर दीप प्रज्जवलन से हुई। इसके बाद रूपाली गोखले द्वारा निर्देशित ध्येय गीत को कंचन, स्वाति, करण और आकाश ने प्रस्तुत किया। तत्पश्चात इन्हीं कलाकारों ने फागुन लोकगीत की प्रस्तुति दी, जिसके बोल थे फागुन के रंग उड़े, पूरवा के संग चले...। इसके बाद संध्या प्रमोद बापट के निर्देशन में स्वाति बाथम के सितार, अमन शर्मा के बांसुरी वादन व उत्कर्ष और सन्नी के तबला वादन की अद्भुत जुगलबंदी में प्रस्तुत राम भजन को राग भोपाली में प्रस्तुत कर कला रसिकों का मन मोह लिया। हिमान्या राजे करकरे द्वारा पारंपरिक परिधानों में भरतनाट्यम के माध्यम से राम स्तुति की मनोहर प्रस्तुति दी। नृत्य के क्रम में मोहिता तांबे ने भरतनाट्यम के माध्यम से गणपति वंदना की आकर्षक प्रस्तुति दी। इसके बाद कलाकार कृतेंद्र द्वारा बुंदेली लोकगीत के माध्यम से शारदा मां के भजन के साथ वसंत ऋतु पर आधारित लोकगीत की मनोहर प्रस्तुति हुई। अंत में नरेंद्र सिंह द्वारा निर्देशित नशा मुक्ति पर आधारित हास्य नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति हुई। 12 मिनट के इस नाटक में 11 कलाकारों ने नशा मुक्ति का संदेश मंच से दिया। 
कार्यक्रम में प्रहलाद सबनानी, यशवंत इंदापुरकर, विजय गुप्ता, राजेंद्र घुरैया, विजय गुप्ता, अनीता करकरे, चंद्रप्रताप सिकरवार, प्रदीप दीक्षित, आशुतोष वाजपेई आदि मौजूद रहे। संचालन व्याप्ति उमडेकर ने, आभार अनीता करकरे ने व्यक्त किया।