आईएसबीटी का कलेक्टर, एसएसपी और निगमायुक्त ने निरीक्षण किया

Mar 13 2025

ग्वालियर। शहर से भागने वाली यात्री बसों का बीच शहर में दबाव कैसे कम किया जाए? स्मार्ट सिटी द्वारा नवनिर्मित इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) कब तक शुरु हो पाएगा? इसी संभावना को तलाशने के लिए गुरूवार को कलेक्टर रुचिका चौहान, एसएसपी धर्मवीर सिंह, निगमायुक्त संघ प्रिय सहित संबंधित विभाग के अफसर निरीक्षण पर निकले। उनकी यात्रा आईएसबीटी से शुरु हुई।
सबसे पहले अधिकारियों की बस यादव धर्मकांटे से गोला का मंदिर चौराहे पर पहुंची। यहां भीड़भाड़ और जाम के हालात देखकर कलेक्टर भी हतप्रभ रह गई, हालांकि बस में पुलिस कप्तान भी सवार थे और पुलिस की गाड़ी बस के सामने भी चल रही थी। अधिकारियों की बस चौराहे से रेसकोर्स रोड की ओर रवाना हुई और बस स्टैंड के आसपास क्षेत्र में भीड़भाड़ अधिक देखने को मिली। सडक़ किनारे बड़ी संख्या में हाथ ठेले देखकर कलेक्टर ने निगमायुक्त से इनको हटवाने के लिए कहा।
अफसरों के इस निरीक्षण का मकसद यह था कि शहर की बीच से जो बसें चलती हैं वे आईएसबीटी से किस रूट से अपने मुकाम को रवाना होंगी। भिंड वाली बस कौन सा रूट पकड़ेगी और शिवपुरी वाली बस किस रूट से जाए कि शहर में जाम के हालात पैदा ना हो सकें। 
मुरैना का रूट तो आईएसबीटी से एकदम साफ है। भिंड के रूट में भी कोई दिक्कत नहीं दिखी पर सबसे ज्यादा परेशानी इस बात को लेकर आ रही है कि शिवपुरी रूट की बसों को कहां से निकाला जाए। इनके लिए बाहर से निकलने का जो रास्ता है उसे तो ट्रक वाले भी पसंद नहीं करते।
ग्वालियर शहर में कई बस स्टैंड है। आमखो से भी बसें चलती हैं। झांसी रोड का बस स्टैंड भी यातायात में खलल डालता है। पड़ाव का बस स्टैंड रेस कोर्स रोड पर जाम लगाता है। गोला का मंदिर पर एक अघोषित बस स्टैंड बना हुआ है। मुरैना जाने वाली बसें मानसिक आरोग्यशाला के पास जमा हो जाती हैं और इतने सारे बस स्टैंड होने से यातायात व्यवस्था लडख़ड़ाती रहती है।