समाज और संस्कृति को दिशा देती हैं फिल्में: संस्कृति मंत्री
Mar 09 2025
ग्वालियर। जिस तरह साहित्य समाज का दर्पण है, उसी तरह फिल्में समाज का प्रतिबिंब होती हैं। समाज में जिस तरह से बदलाव आया है, आज की फिल्मों में भी यह दिखाई दे रहा है। अब फिल्मों में भारत की बात दिखाई दे रही है। पहले एक खास वर्ग के फिल्म निर्माताओं ने हमारे वास्तविक इतिहास को छिपाया और समाज को भ्रमित करने का प्रयास किया। लेकिन आज ऐसी फिल्में बन रही हैं जो वास्तविकता को दिखा रही हैं। ग्वालियर शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल निश्चित रूप से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में समाज और संस्कृति को सही दिशा देने में सहायक सिद्ध होगा। मध्यप्रदेश सरकार भी फिल्म क्षेत्र को आगे ले जाने का काम करेगी। यह बात प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने आईआईटीटीएम में दो दिवसीय ग्वालियर शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के उदघाटन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से कही।
सतपुड़ा चलचित्र समिति और विश्व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में हो रहे कार्यक्रम में विशेष अतिथि फिल्म निर्देशक देवेंद्र मालवीय, फिल्म प्रोड्यूसर अतुल गंगवार, उद्यमी दीपक जादौन थे। अध्यक्षता सतपुड़ा चलचित्र समिति मध्य प्रदेश के अध्यक्ष लाजपत आहूजा ने की।
मुख्य अतिथि लोधी ने कहा कि कश्मीर फाइल्स, द केरला स्टोरी, साबरमती रिपोर्ट, छावा जैसी फिल्मों को देखकर लोगों को सच्चाई का पता चला है। मध्यप्रदेश में भी अच्छी फिल्मों का निर्माण हो, इसके लिए हम नई पर्यटन नीति लेकर आए हैं। जिसके माध्यम से शॉर्ट फिल्म, डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को भी अनुदान मिलने लगा है। प्रदेश में फिल्म फ्रेंडली माहौल बनने से यहां अब तक 500 से ज्यादा फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। इस वजह से मप्र को मोस्ट फिल्म फ्रेंडली अवार्ड भी मिल चुका है।
कार्यक्रम की अवधारणा लोकेंद्र सिंह ने बताई। इस अवसर पर अतुल गंगवार ने भारतीय चित्र साधना की जानकारी दी। स्वागत भाषण आलोक शर्मा ने दिया। संचालन सौरभ कुमार एवं आभार रवींद्र दीक्षित ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लाजपत आहूजा ने कहा कि आज वास्तविकता को लेकर बनाई जा रहीं फिल्मों से देश में जागृति आ रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार से फिल्म विकास निगम दोबारा शुरू करने का आग्रह किया, ताकि युवा पीढ़ी को इससे लाभ मिल सके।
देवेंद्र मालवीय ने फिल्म निर्माताओं से संस्कृति पर आधारित फिल्में बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है जिन देशों की संस्कृति नष्ट हो गई, वह देश भी खत्म हो गए, क्योंकि संस्कृति समाज की आत्मा है। उन्होंने कहा कि फिल्में नैरेटिव बनाने में अहम भूमिका अदा करती हैं।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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