जेल पहुंचकर संत सौम्यसागर ने दिया धर्म का संदेश
Mar 01 2025
ग्वालियर। मुनिश्री सौम्यसागर महाराज ने केंद्रीय कारागर के बंदियों के बीच पहुंचे और वहां उन्हें पूजापाठ में लीन देखकर कहा कि मैं यहां सोचकर आया था कि यहां यातना दी जाती होगी, लेकिन यहां तो प्रार्थना भी की जाती है। इस मौके पर मुनिश्री सौम्यसागर ने जेल परिसर में मौजूद जैन मंदिर एवं गौशाला का अवलोकन भी किया।
सौम्यसागर महाराज ने कहा कि मानसिक संतुलन जब गड़बड़ाता है तो व्यक्ति जेल जाता है, लेकिन जब पूर्ण रूप से मानसिक संतुलन खराब हो जाए तो उसे मानसिक आरोग्यशाला में जाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आपत्ति को अवसर में बदलें, जैसे दशरथ के राम वन में जाकर श्रीराम यानि हम सबके आराध्य बन पाए। सौम्य सागर ने कहा कि मुसीबत में किसी से कोई अपेक्षा मत करो और न कुछ मांगो। मुसीबत कुछ दिन की होती है और अहसान जिंदगी भर का होता है। मुनिश्री ने कविता की पंक्तियों से यह संदेश दिया- जिनसे मेरे कर्म कटे वे शत्रु कैसे, जिनसे मेरे कर्म बड़े वे मित्र कैसे? मुनिश्री से बंदियों ने अपने जीवन से संबधित प्रश्न किए और मुनिश्री ने उनका समाधान भी किया।
मुनिश्री निश्चल सागर ने डाकू से संत बने महर्षि बाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डाला कि जब उन्हें यह समझ आ गया कि पाप का कोई भागीदार नहीं बन सकता, तो उन्होंने अपने परिवार के पोषण के लिए दूसरों को लूटने का जीवन छोड़ दिया। खुद को ईश्वर के ध्यान में लगा दिया।
इस मौके पर मुनिश्री सौम्यसागर को जेल अधीक्षक विदित सरवैया, जेलर आरजी पाल, सहायक जेल अक्षीक्षक रुचि शर्मा, सहायक जेल अक्षीक्षक प्रवीण त्रिपाठी ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट किया। इस मौैके पर पूर्व कलेक्टर आरके जैन, बायके जैन, मोदी राकेश जैन, दिनेश जैन, संदीप जैन, अशोक जैन, जितेंद्र भैया, गौरव जैन, अंकुर जैन, अभिषेक चौधरी, धमेंद्र चौधरी, अंकित जैन, रौनक सिंघई आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









