मामा माणिकचंद वाजपेयी ने सीमित साधनों में अपने विचारों का प्रचार प्रसार किया

Feb 24 2025

ग्वालियर। मामा माणिकचंद वाजपेयी ने सीमित साधनों में समर्पण के साथ अपने विचारों का प्रचार प्रसार किया था। स्तंभलेखक प्रामाणिकता, समर्पण, निस्वार्थता और समर्पण भाव से देशहित में लेखन करें। यह बात शिक्षाविद् एवं नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गोविंद प्रसाद शर्मा ने स्व. माणिकचंद वाजपेयी मामाजी की स्मृति में आयोजित स्तम्भ लेखक सम्मान एवं संवाद समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में कही। 
मामा माणिकचंद वाजपेयी स्मृति सेवा न्यास का यह आयोजन राष्ट्रोत्थान न्यास भवन नई सडक़ के विवेकानंद सभागार में हुआ। मुख्य अतिथि जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव अरुण चौहान ने लेखकों से पर्यावरण और जल संरक्षण पर लेख लिखने का आह्वान किया। अध्यक्षता कर रहे न्यास के सचिव राजेश शुक्ला ने लेखकों से अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आग्रह किया। अतिथियों का परिचय प्रवीण दुबे, स्वागत दिलीप मिश्रा, आलोक बंधु श्रीवास्तव, ब्रजमोहन शर्मा, दीपक सोनी, मनीष मांझी ने किया। प्रस्तावना राजेश वाधवानी ने रखी। संचालन वंदना सेन एवं आभार मनीष मांझी ने व्यक्त किया। 
इस अवसर पर प्रतियोगिता में चयनित आलेखों में प्रथम स्थान वरिष्ठ स्तम्भकार प्रवीण गुगनानी (बैतूल), द्वितीय डॉ. वंदना गांधी (भोपाल), तृतीय डॉ. नीलम महिंद्रा, विशिष्ट स्थान रमेश शर्मा ने प्राप्त किया। वहीं नवोदित स्तम्भकारों की तात्कालिक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान डॉ. दीप्ति गौड़, द्वितीय व्याप्ति उमड़ेकर एवं तृतीय स्थान ऋषिकेश बौहरे ने हासिल किया। सभी विजेताओं को अतिथियों ने सम्मानित किया।