आज प्रतियोगिता का युग है:केएन रघुनंदन
Feb 23 2025
ग्वालियर। आज प्रतियोगिता का युग है और प्रतियोगिता में बने रहने के लिए युगीन उपकरणों तथा नियोजित कार्य गति की आवश्यकता होती है। यदि कोई भी शिक्षण संस्थान छात्रों की अभिरुचि, पाठ्यक्रमों के रोजगारपरक प्रारूप, शिक्षकों की अध्यापन प्रणाली और समाज पोषित शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता से चिंतन करते हुए संचालित किया जाता है तो वह निश्चित ही एक आदर्श की स्थापना कर सकता है।
यह बात मध्य भारत शिक्षा समिति की ओर से हुई चिंतन संगोष्ठी में मुख्य वक्ता नोयडा से आए विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय संगठन मंत्री केएन रघुनंदन ने कही। उन्होंने आगे कहा कि यदि शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य, शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी और उनके अभिभावक सभी मिलकर एक साथ एक ही दिशा में एक जैसा विचार लेकर गतिशील होते हैं तो निश्चित ही शून्य से शिखर तक जैसे ध्येय वाक्य को साकार किया जा सकता है।
एक दिवसीय दो सत्रों में विभाजित चिंतन संगोष्ठी में बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गोविंद प्रसाद शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा के केंद्र में शिक्षकों को रखा गया है। यदि शिक्षक ज्ञान, संस्कार और सिद्धांत की दृष्टि से परिपक्व है तो वह निश्चित ही चरित्रवान नागरिक तैयार करेगा। छात्र को स्वयं को अभिव्यक्त करने का अधिकार और अवसर मिलना ही चाहिए। इसी से उसकी रचनात्मक प्रतिभा का विकास होता है।
कार्यक्रम में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्व विद्यालय की कुलगुरु डॉ. स्मिता सहस्त्रबुद्धे, डॉ. राजेंद्र सिंह, डॉ. आलोक शर्मा, प्रहलाद सबनानी, हेमंत सेठिया, डॉ. कुमार संजीव, डॉ. राकेश सिंह कुशवाह, डॉ. केके कल्याणकर, डॉ. आरएस शर्मा, नरेंद्र कुंटें डॉ. मंदाकिनी शर्मा, डॉ. वंदना सेन तथा प्रो. संजय त्रिवेदी आदि ने भी विचार रखे। इसका संचालन डॉ. राजेंद्र वैद्य ने तथा संगोष्ठी का संयोजन माधव विधि महाविद्यालय द्वारा किया गया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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