बाहर से आए कलाकारों ने गायन-वादन और नृत्य से संबंधित वर्कशॉप ली

Feb 22 2025

ग्वालियर। संगीत विश्वविद्यालय में तबले पर पड़ती थाप, घुंघरुओं की झनकार और हारमोनियम से निकले रागों से गुंजायमान रहा। यह माहौल लगभग 6 घंटे तक बना रहा। इस दौरान अलग-अलग शहरों से आए कलाकारों ने गायन-वादन और नृत्य से संबंधित वर्कशॉप ली, बल्कि लाइव डिमांस्ट्रेशन देकर संबंधित विधा की विशेषताओं के बारे में बताया। 
कला संगम के नाम से डिजाइन किया गया कार्यक्रम विवि के आठ सभागारों में चला। संगीत साधकों ने युवाओं से कहा कि अगर आप चुनी हुई विधा में आगे बढऩा चाहते हैं तो गुरु-शिष्य परंपरा का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि कला के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। इन बदलाओं को आत्मसात कर आगे बढ़ें, तकनीकी के प्रभाव को महसूस करें। अपनी विधा में सामाजिक विषयों को भी शामिल करें। यह कार्यक्रम प्रयास शिक्षा, साहित्य, कला व संगीत पीठ समिति के सहयोग से हुआ।
इसके प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि खलील अहमद, विशिष्ट अतिथि संगीतज्ञ पं. प्रभाकर गोहदकर रहे। वहीं समापन सत्र के विशिष्ट अतिथि गंगादास की शाला के स्वामी रामसेवक दास महाराज रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने की। 
इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. राकेश कुशवाह, डॉ. आशुतोष खरे, डॉ. मनीष करवड़े, डॉ. अंजना झा, डॉ. एसके मैथ्यू, डॉ. संजय सिंह, डॉ. पारूल दीक्षित, डॉ. गौरीप्रिया, डॉ. हिमांषु द्विवेदी, विवेक पांडेय, डॉ. श्याम रस्तोगी, डॉ. शैलेंद्र मोहिते, नीरज कुमार झा कालेज पीआरओ कुलदीप आदि उपस्थिति रहे।