महानतम सेनापति थे महादजी शिंदे

Feb 10 2025

ग्वालियर। 18वीं सदी में भारतीय उपमहादीप के सबसे महानतम सेनापति महादजी शिंदे दक्ष रणनीतिज्ञ एवं कुशल प्रशासक तथा महायोद्धा ही नहीं थे बल्कि व्यक्तिगत जीवन में वे सरल, सहिष्णु, धौर्यशील और उदार भी थे। उन्होंने हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी के स्पप्न को पूर्ण करने के लिए जो कार्य किए वे अद्वितीय हैं।
पानीपत युद्ध के महायोद्धा महादजी शिंदे की 231वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करने आए महादजी भक्त मण्डलं के अध्यक्ष जयेन्द्र राव संभाजीराव अवाड ने यह बात कही। महादजी शिंदे पार्क में स्थित उनके प्रतिमा स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करते हुए शस्त्र पूजन भी किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि महादजी शिंदे में नेतृत्व शक्ति और सैनिक प्रतिभा तो थी ही साथ ही राजनीतिज्ञता भी असाधारण थी। 
उन्हीं की दम पर पानीपत की तीसरी लड़ाई के बाद मराठा साम्राज्य का पुनरुत्थान हो सका था। उनकी सेना उस समय सबसे प्रशिक्षित सेना मानी जाती थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई विद्रोहों का दमन किया था।
इस अवसर पर सद्गुरु अण्णा महाराज मठ के महंत मनीष विठ्ठल महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता लाल टिपारा गौशाला के अध्यक्ष स्वामी वृषभदेवानंद ने की। 
इस अवसर पर नीलेश करकरे, रमेश अग्रवाल, ईश्वरचंद करकरे, नीलेश करकरे, तुषार घोडके, निशिकांत मोघे, अमर कुटे सहित अन्य लोग उपस्थित थे।