मुनिश्री सुधाकर और मुनिश्री नरेश कुमार हुआ भव्य मंगल प्रवेश

Feb 07 2025

ग्वालियर। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा की ओर से तेरापंथ के मुनिश्री सुधाकर एवं सहवर्ती मुनिश्री नरेशकुमार ठाणा का शुक्रवार को नगर मंगल प्रवेश शोभायात्रा समाधियां कॉलोनी से निकली गई। मुनिश्री की आगवानी मुख्य अतिथि संयुक्त कलेक्टर संजीव जैन के साथ जैन समाज के लोगो ने की।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री सुधाकर एवं सहवर्ती मुनिश्री नरेशकुमार रायपुर से अहिंसा पद यात्रा करते हुए ग्वालियर पहुंचे। मुनिश्री ग्वालियर शहर में प्रवेश करते हुए नगर प्रवेश शोभायात्रा निकाली गई। मंगल प्रवेश शोभायात्रा में तेरापंथ महिला मंडल की महिलाएं केसरिया साड़ी में हाथों में पचरंगी जैन ध्वजा के साथ पुरुषगण ने गुरुदेव के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। दोनों मुनिश्री की आगवानी ग्वालियर के संयुक्त कलेक्टर संजीव जैन, पारस जैन, महेंद्र जैन, प्रवीण गंगवाल, अनिल शाह, अक्षय दानी,  निर्मल जैन के साथ समाज के लोगों ने की। 
जीने की कला तो हर धर्म सिखाता है, मरने की कला तो सिर्फ जैन धर्म सिखाता है-मुनिश्री सुधाकर
मुनिश्री सुधाकर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया को जीने की कला तो हर धर्म सिखाता है, मगर मरने की कला तो सिर्फ जैन धर्म सिखाता है। जैन धर्म में त्याग, तपस्या, संयम, और साधना व्यक्ति की आत्मा का बोध करती है। संसार में समय की ताकत बड़ी अटूट होती है। समय किसी का इंतजार नहीं करता और नहीं किसी का ईकार करता हे। क्योंकि समय के पास पंख नहीं होते। जिंदगी में चार चीज ऐसी होती है जो एक बार हाथ से निकाल ने के बाद लाख कोशिश करने के बाद भी वापस नहीं आती है। व्यक्ति के जीवन में वह चार चीज पहले कमान से निकला हुआ तीर, दूसरा खोया हुआ अवसर, तीसरा मुंह से निकला हुआ शब्द और चौथा मीठा वक्त। मुख्य अतिथि संयुक्त कलेक्टर संजीव जैन ने कहा कि हमें संतो के दर्शन करने से हमारा जीवन धन्य हो जाता है।