संविधान देता है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार:भार्गव

Feb 03 2025

ग्वालियर। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म के आधार पर वंश के आधार पर अथवा जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। अधिकारों से किसी को भी वंचित नहीं किया जा सकता। यह बात संविधान में भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए मदन भार्गव ने कही। उन्होंने कहा कि संविधान में यह भी उल्लेखित है कि छुआछूत को लेकर किसी को भी अपमानित नहीं किया जा सकता। हमारा संविधान भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है इससे किसी को वंचित नहीं किया जा सकता।
विचार प्रवाह अध्ययन एवं शोध केन्द्र, नई सडक़ द्वारा संविधान निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने पर संविधान निर्माण में डॉ. भीमराव आंबेडकर का योगदान एवं भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर त्रैमासिक व्याख्यान माला का आयोजन विवेकानंद सभागार में किया गया। इसमें डॉ. संदीप मौर्य ने कहा, संविधान एक व्यक्ति अथवा समाज के लिए ना होकर सभी नागरिकों के लिए एक समान है। हमारे तिरंगे में 24 तिल्लियां हैं वह जनमानस के 24 कर्तव्यों को दर्शाती हैं। शोध केंद्र के सुधीर शर्मा ने विचार प्रवाह अध्ययन एवं शोध केंद्र की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए बताया, यह अध्ययन केंद्र 21 फरवरी को अपनी स्थापना के 3 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता आरके बहेरिया ने की।
इस अवसर पर श्रीमती अर्चना सगर, विनोद अष्टैया, डॉ रवि अंबे, डॉ. माखीजानी, अजय निरंकारी, अर्जेन्दर छाबरिया, डा वर्सेना, राजेश कटारे बाल्मीकी, रामसेवक कटारे, मोनिका घई, रविकांत बनाफाल प्रेमदास माने, कुलदीप पंवारआदि  उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती वर्षी सुमन द्वारा किया गया। आभार प्रमोद चौहान द्वारा किया गया।