काव्य संकलन: मत मेरे कहने से रुकना का समीक्षा कार्यक्रम आयोजित

Feb 01 2025

ग्वालियर। मध्यभारतीय हिन्दी साहित्य सभा ग्वालियर द्वारा मासिक पाठक मंच में नगर की महिला साहित्यकार पुष्पा सिसोदिया के काव्य संकलन मत मेरे कहने से रुकना पर समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार डॉ.श्रद्धा सक्सेना ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार सुबोध चतुर्वेदी उपस्थित रहीं। 
युवा रचनाकार सुश्री पलक सिकरवार ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करते हुये कहा कि पुस्तक में देश प्रेम,युवाओं के लिये पाथेय प्रदान करने के साथ ही पर्यावरण चिंतन, पारिवारिक मूल्यों को अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया है। शब्दों के कौतुक से यथार्थ का पुट देने वाली इसकी विभिन्न कविताएं हृदय को स्पंदित कर पाठकों को आत्मविभोर करती हुई प्रतीत होती हैं। नि:संदेह पुस्तक की लेखिका पुष्पा सिसोदिया ने अद्भुत ऊर्जा व सच्ची अनुभूति से इसकी एक-एक पंक्ति को सजाया है। 
वहीं साहित्यकार श्रीमती सुनीति वैस ने पुस्तक पर समीक्षा करते हुये कहा कि पुष्पा की पुस्तक में एकता, सद्भाव, करुणा, प्रेम का संदेश है। पुष्पा जी की कविताओं में हर व्यक्ति के दर्द को शब्द दिये गये है। बीमारी का दुलार, विनम्रता दीप्तिमा, दीपावली, दिल्ली की एक शाम, अब सुनकर क्या करोगे, मत मेरे कहने से रुकना जैसी कविताओं में जीवन के प्रत्येक आयाम को सहज भाषा मे व्यक्त किया है। उन्होंने आगे कहा कि लेखिका ने देश को, परिवार को, नारी को, सैनिकों के जीवन को व्यक्त कर अपने साहित्यिक कर्त्तव्य को पूरा किया है। काव्य संग्रह मत मेरे कहने से रुकना पठनीय है,अनुकरणीय है।
कार्यक्रम में उपस्थित लेखिका पुष्पा सिसोदिया ने अपनी पुस्तक पर बात रखते हुये बोला कि-पुस्तक में संकलित कविताएँ वास्तव में मेरे अंतर्मन की दीवारों पर अंकित रहीं। मेरी पुस्तक को आकार देने में मुझ पर समाज का ऋण, बच्चों का ऋण है। आज के युग में व्यवसाय के चलते नारी को अपनी पहचान को खोना पड़ता है इसलिये मेरे लेखन में स्त्री के मन की पीड़ा मैंने अपना परिचय तुमसे जोड़ दिया है पर ये न समझना मेरा कोई अस्तित्व नहीं है। के रूप में मुखर होती है। 
कार्यक्रम में  सुधीर चतुर्वेदी, डॉ राजरानी शर्मा, डॉ उर्मिला त्रिपाठी, मुकुंद पराडक़र, डॉ सुरेश सम्राट, आरती श्रीवास्तव, उपेंद्र कस्तूरे, राम चरण रुचिर, अशोक कुमार, जय प्रकाश श्रीवास्तव, आशीष उमड़ेकर, दिनेश पाठक सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित रहे।