असहयोग आंदोलन में महिला और पुरुष, युवा भी शामिल रहे

Jan 30 2025

ग्वालियर। महारानी लक्ष्मीबाई कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में चल रहे मूल्य वर्धित पाठ्यक्रम (भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन) राजनीति विज्ञान की आमंत्रित वक्ता प्रो. ज्योत्सना राजपूत ने खिलाफत आंदोलन, असहयोग आंदोलन, साइमन कमीशन एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन पर अपना उद्बोधन प्रस्तुत किया। 
इस विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार भारत में खिलाफत आंदोलन की शुरूआत हुई और महात्मा गांधी ने इसका आंदोलन का समर्थन क्यों किया वहीं महात्मा गांधी के प्रसिद्ध असहयोग आंदोलन के बारे में बताते हुए कहां की यह प्रथम ऐसा जन आंदोलन था जिसमें महिला पुरुष युवा सभी सम्मिलित हुए इस आंदोलन में पहली बार देश की जनता ने विदेशी वस्तुओं, शिक्षा, सरकारी नौकरियों, को त्याग कर स्वदेशी शिक्षा, स्वदेशी वस्तुएं, ग्राम पंचायत एवं स्वशासन की मांग को अपनाया गया और भारत में यह आंदोलन सफलता से चल रहा था। तभी चोरी चौरा नामक स्थान पर जनता ने पुलिस चौकी को जला दिया। जिसमें 22 पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई। तब गांधी ने इस आंदोलन को वापस ले लिया था।
डॉ दीपक शर्मा ने भारत विभाजन पर कहां कि अगस्त 1947 में भारत का विभाजन त्रासदी की लंबी सूची है। इस दौरान कम से कम 14 मिलियन हिंदू, सिख और मुसलमान अपने पैतृक गांव और कास्बो से निकाल कर उन इलाकों में चले गए जहां वे पहले कभी नहीं रहे, इसने एक ऐसी कड़वी विरासत को जन्म दिया जो आज भी कायम है।
 भारतीय उपमहाद्वीप के विभाजन के बाद से अब तक के अनुभव बताते है कि बटवारा कोई हल नहीं बल्कि खुद अपने आप में ही एक समस्या है शहीद भगत सिंह दोनों मुल्कों के सांझे क्रांतिकारी है, जिनका जन्म भी पाकिस्तान में हुआ और मौत भी वही हुई।