जहां सत्संग वहां भक्त से मिलने आते हैं प्रभु:घनश्याम शास्त्री

Jan 03 2025

ग्वालियर। परमात्मा साधन साध्य नहीं है, वो कृपा साध्य हैं। इसलिए जहां भावपूर्ण सत्संग होता है, वहां भगवान भक्तों से मिलने अवश्य आते हैं। जिस कथा में भक्तों के हाथ जुड़े रहते हैं, आंखों से विरह के आंसू निकलते हैं, मस्तक विनम्र भाव में हो, वहां करूणावतार अवश्य आते हैं। यह बात पारदी मोहल्ला शिंदे की छावनी में चल रही देवी भागवत कथा के दूसरे दिन घनश्याम शास्त्री ने कही।
उन्होंने कहा स्कंदमाता माता को दयालु माना जाता है। देवी दुर्गा का यह स्वरूप मातृत्व को परिभाषित करता है। वहीं प्रेम और ममता की मूर्ति स्कंदमाता की पूजा करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। मां आपके बच्चों को दीर्घायु प्रदान करती हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार भोलेनाथ की अर्धांगिनी के रूप में मां ने स्वामी कार्तिकेय को जन्म दिया था। स्वामी कार्तिकेय का दूसरा नाम स्कंद है, इसलिए मां दुर्गा के इस रूप को स्कंदमाता कहा गया है।