लोकतंत्र के पहरुए में आदिवासी समाज एवं संस्कृति का चित्रण है-राजनारायण बोहरे

Dec 31 2024

ग्वालियर। मध्यभारतीय हिन्दी साहित्य सभा द्वारा पाठक मंच कार्यक्रम के अंतर्गत सभा की उपाध्यक्ष एवं महिला साहित्यकार डॉ. पद्मा शर्मा की पुस्तक लोकतंत्र के पहरुए पर समीक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया। 
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डबरा से पधारे साहित्यकार रामगोपाल तिवारी भावुक, विशिष्ट अतिथि के रूप में वाणिज्यिक कर विभाग से सेवानिवृत्त दतिया निवासी राजनारायण बोहरे, कार्यक्रम के अध्यक्षडॉ.कुमार संजीव और सेवानिवृत्त प्राध्यापक रामभरोसे मिश्र उपस्थित रहे। पुस्तक की समीक्षा प्राध्यापक डॉ.रविकांत द्विवेदी और प्राध्यापक डॉ.संगीता जैतवार ने प्रस्तुत की। 
डॉ द्विवेदी ने अपने समीक्षा वक्तव्य में कहा कि राजनीतिक मुद्दों पर महिलाएँ लेखन नहीं करतीं इस भ्रांति को पद्मा शर्मा ने अपनी रचना के माध्यम से दूर किया है। उन्होंने औपन्यासिक तत्वों के आधार पर उपन्यास की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करते हुये उपन्यास को भाषा प्रयुक्ति, चरित्रों की संगठनात्मक सरंचना की दृष्टि से एक श्रेष्ठ उपन्यास बताया। डॉ. संगीता जैतवार ने कहा कि उपन्यास का पात्र सुदर्शन तिवारी हमारे समाज के दोगुले चेहरों का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। 
इस अवसर पर राम चरण रुचिर, उपेंद्र कस्तूरे, डॉ लोकेश तिवारी, डॉ राजरानी शर्मा, डॉ संध्या बोहरे, रवींद्र झारखरिया, डॉ विकास शुक्ल, डॉ उर्मिला त्रिवेदी, डॉ सुखदेव मखीजा, डॉ सीता अग्रवाल, डॉ.राजेन्द्र वैद्य, डॉ अशोक, डॉ करुणा सक्सेना, डॉ ज्योति उपाध्याय, सरिता चौहान, शुभी गुर्जर, अभिषेक राजपूत, प्रथम बघेल, राकेश पांडे, दीपक कोल आदि उपस्थित रहे।  कार्यक्रम का संचालन डॉ. मन्दाकिनी शर्मा एवं दीक्षा शाक्य ने तथा सभी का आभार डॉ मंजूलता आर्य ने किया।