शताब्दी समारोह में दुर्लभ वाद्यों यंत्रों का छाया जादू

Dec 15 2024

ग्वालियर। विश्व संगीत समागम तानसेन समारोह उत्सव के 100 वर्ष के अन्तर्गत गत देर शाम विशेष संगीत संध्या अंतर्गत ग्वालियर के 10 प्रमुख स्थलों पर 10 दुर्लभ वाद्यों का वादन हुआ। संगीत नगरी इन दुर्लभ वाद्यों की अनुगूंज से सुरमई हो उठी।
दुर्लभ वाद्य वादन की श्रृंखला में महारुद्र मंडल संगीत महाविद्यालय में संतूर के तारों से निकली धुनों ने श्रोताओं पर तिलिस्म किया। सुप्रसिद्ध संतूर वादक श्रुतिअधिकारी, भोपाल ने यहां राग किरवानी पर तार छेड़े। राजा मानसिंह संगीत विश्वविद्यालय में यहां एक ऐसे वाद्ययंत्र का वादन हुआ, जो बंदूक की नाल से नि:श्रृत हुआ है। नालतरंग जिसे उस्ताद अलाउद्दीन खां ने रचा था। शंकर गंधर्व महाविद्यालय में हिमांशु सैनी, मैहर का सरोद वादन हुआ। 
गंगादास की बड़ी शाला में अब्दुल सलाम नौशाद का क्लेरोनेट वादन हुआ। तानसेन कला वीथिका में छतरपुर के पंडित अवधेश द्विवेदी एवं अनमोल द्विवेदी का पखावज वादन हुआ। टाउन हॉल में सतीश खानवलकर एवं अमरीश कालेले की मोहनवीणा जुगलबंदी आयोजित की गई।
चंदन सी महक उठी गजल
पांच दिवसीय तानसेन समारोह पूर्वरंग गमक कार्यक्रम में देश के प्रख्यात गजल गायक चंदन दास की गजलों ने शहरवासियों को सराबोर कर दिया। इस अवसर पर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मुख्य अतिथि के रूप में संभाग आयुक्त मनोज खत्री उपस्थित थे। गजल गायन का शुभारम्भ करने से पूर्व चंदन दास ने कहा कि मैं खुद को भाग्यशाली अनुभव कर रहा हूं कि तानसेन शताब्दी समारोह का हिस्सा बन पाया। उन्होंने बिना वक्त गंवाए खूबसूरत शाम में मौसिकी के रंग घोलना शुरू कर दिया।