शिक्षा के विकास में सिंधिया परिवार ने दिया अमूल्य योगदान : धनखड

Dec 15 2024

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में जीवाजी राव सिंधिया की प्रतिमा का अनावरण रविवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि ग्वालियर में शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में सिंधिया परिवार का बहुत बड़ा योगदान रहा है। 
वहीं इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि हमारा शहर संगीत और संस्कृति के लिए जाना जाता है। आज हमारे लिए गौरव की बात है कि इस अवसर पर उपराष्ट्रपति यहां आए हैं। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति की पत्नी सुदेश धनकड़ भी उपस्थित थी। 
मुख्य समारोह 12.15 बजे शुरु हुआ। मंच पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर व उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट, मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, मंत्री राजेश शुक्ला उपस्थित थे। प्रारंभ में जेयू परिवार के सदस्यों ने सभी अतिथिगण का स्वागत किया। 
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जीवाजी विश्वविद्यालय में पहुंचकर सबसे पहले ग्वालियर के पूर्व महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की प्रतिमा का लोकार्पण किया। इसके बाद अटल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे।
जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अविनाश तिवारी ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आज जीवाजी विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि महाराजा जीवाजी राव सिंधिया ने ग्वालियर में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सिंधिया परिवार ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए जमीन प्रदान की। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रगति का लेखा जोखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि अपनी स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय लगातार उत्तरोत्तर प्रगति कर रहा है। विश्वविद्यालय को मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 100 करोड रुपए मिल चुके हें और 114 बीघा जमीन मिल चुकी है। 
 जीवाजी विवि में लगाई गई जीवाजी राव सिंधिया की प्रतिमा ग्वालियर के मूर्तिकार प्रभात राय ने बनाई है। यह प्रतिमा आरके स्ट्रक्चर ब्रॉन्ज धातु से करीब 24 लाख रुपए की लागत से बनाई गई है। प्रतिमा 11 फीट ऊंची है। यह मूर्तिकार प्रभात राय द्वारा बनाई गई अंतिम प्रतिमा है।
समारोह स्थल पर कार्यक्रम प्रारंभ होने से पहले पुलिस बैंड ने कई धुने बजाई और लोगों को अपनी सुमधुर बैंड की ध्वनि से लोगों का मन मोह लिया।
जीवाजी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के कारण पूरा जीवाजी विश्वविद्यालय कड़ी सुरक्षा के घेरे में रहा। इस दौरान सिर्फ उन्हीं लोगों को विश्वविद्यालय में प्रवेश की अनुमति दी गई जिनके पास कार्यक्रम के पास थे।