सांगीतिक वैभव में दिखी गायकी और वादन की ऐतिहासिक यात्रा

Dec 07 2024

ग्वालियर। ब्रह्मनाद के नवोदित साधकों ने जब राग-रागनियों में पिरोकर दानेदार एवं बुलंद आवाज में सुरीली तान खींची तो लगा कि मानो ग्वालियर की घरानेदार गायकी के सुमधुर सुरों के फूल झर रहे हैं। लोकवाद्यों से सजे मंच पर ग्वालियर घराने के अनमोल योगदान और उसकी ऐतिहासिक यात्रा को नवोदित कलाकारों ने गायन व वादन से अलग-अलग राग और ताल में प्रदर्शित कर जीवंत कर दिया। ग्वालियर से जुड़ी नृत्य कला के भी सजीव दर्शन हुए। 
अवसर था संगीत शिरोमणि तानसेन की याद में आयोजित शताब्दी तानसेन समारोह के मंगलाचरण स्वरूप भारतीय पयर्टन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान के सभागार में सजी ग्वालियर के सांगीतिक वैभव सभा का। कार्यक्रम का माया सिंह, संत कृपाल सिंह, संभागायुक्त मनोज खत्री, कलेक्टर रुचिका चौहान, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु स्मिता सहस्त्रबुद्धे व यशवंत इंदापुरकर ने दीप प्रज्वलित कर सभा का शुभारंभ किया। 
एक ही मंच पर एक साथ गायन की ध्रुपद शैली, बैजू बावरा की धमार शैली, ख्याल गायकी, सरगम, जयदेव की अष्टपदी एवं टप्पा व ठुमरी की प्रस्तुति ने रसिकों के कानों में मिसुरी घोल दी, वादन में स्वर और अवनद्ध वाद्यों की झंकार सुनाई दी, तो शास्त्रीय नृत्य में जयपुर, लखनऊ, ग्वालियर और रायगढ़ घराने के पारंपरिक कथक के साथ भरतनाट्यम आकर्षण का केंद्र रहे। लांगुरिया लोक नृत्य ने प्रांगण को झंकृत किया। 
डॉ. अभिजीत सुखदाणे के निर्देशन में सुदीप भदौरिया ने राग भूपाली, ताल चौताल में निबद्ध ध्रुपद की प्रस्तुति दी। जयवंत गायकवाड ने पखावज पर संगत की। बैजू बावरा की धमार गायकी की प्रस्तुति डॉ. अभिजीत सुखदाणे के निर्देशन में योगिनी तांबे ने राग रागेश्री में आज बृज में उड़त गुलाल... को प्रस्तुत कर मन मोह लिया।
वहीं वादन की शुरुआत स्वरवाद्य से हुई। सरोद वादन की मनोहर प्रस्तुति हुई। इसके बाद दीपांशु शर्मा ने पं श्रीराम उमड़ेकर के निर्देशन में राग चक्रधर में सितार वादन किया। संजय राठौर ने तबले पर संगत की। अंकुर धारकर ने प्रवीण शेवलीकर के निर्देशन में वायलिन की अद्भुत प्रस्तुति राग झिंझोटी में दी। फिर अदुल हमीद ने राग किरवानी में सारंगी बजाई। कथक की घरानेदार परंपरा मंच से देखने को मिली। इसमें पहले शिवा नायक के निर्देशन में लक्षिता शर्मा, ज्योति तोमर ने ग्वालियर के पुरूषोाम नायक के घराने की परंपरा को मंच से प्रस्तुत किया। इसके बाद डा. तरूणा सिंह के निर्देशन में लखनऊ घराने के नृत्य को खुशी गुप्ता ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर कलेक्टर रुचिका चौहान ने परिकल्पना व संयोजन के लिए राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे को सम्मानित किया, साथ ही प्रस्तुति देने वाले सभी कलाकारों व आचार्यों को प्रशस्ति पत्र सौंपे। 
कार्यक्रम में ध्यानेन्द्र सिंह, नीतू माथुर, आलोक शर्मा, प्रो. राकेश कुशवाह, केशव पाण्डेय, अतुल अधोलिया, डॉ. पारूल दीक्षित व जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे। मंच संचालन अशोक आनंद ने किया।